जेवर गौतमबुधनगर/ फेस वार्ता: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास की दिशा में ज़ेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक ऐतिहासिक परियोजना के रूप में उभर रहा है। आज यह परियोजना न केवल भारत के सबसे बड़े हवाई अड्डों में से एक बनने जा रही है, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को बदल देने की क्षमता भी रखती है। इस एयरपोर्ट के निर्माण के पीछे वर्षों का प्रयास, राजनीतिक इच्छाशक्ति और किसानों के साथ सतत संवाद की एक लंबी कहानी है।
इस कहानी की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई, जब उत्तर प्रदेश में नई सरकार बनने के बाद ज़ेवर विधानसभा के विधायक धीरेन्द्र सिंह ने विधानमंडल दल की बैठकों में मुख्यमंत्री के समक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित करने की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाया।
उनका तर्क था कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते हवाई यातायात को देखते हुए एक वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आवश्यक है, और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र इसके लिए सबसे उपयुक्त स्थान हो सकता है। मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और राज्य सरकार ने इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ समन्वित प्रयास शुरू किए।
लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप जून 2017 में भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की। इसके बाद परियोजना की विस्तृत योजना, तकनीकी अध्ययन और स्थान निर्धारण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) को इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई।
वर्ष 2018 और 2019 में परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी चरण में सबसे बड़ी चुनौती सामने आई। कई गांवों के किसानों को आशंका थी कि भूमि अधिग्रहण के बाद उनके भविष्य और आजीविका पर संकट आ सकता है। इस कारण प्रारंभिक चरण में कई किसानों ने अपनी भूमि देने से इंकार कर दिया।
ऐसे समय में ज़ेवर के विधायक धीरेन्द्र सिंह ने संवाद का मार्ग चुना। उन्होंने गांव-गांव जाकर किसानों के साथ बैठकें कीं और घर-घर जाकर उनसे बातचीत की। उन्होंने किसानों को समझाया कि यह एयरपोर्ट केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र के विकास का आधार बनेगा। इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे, उद्योगों का विकास होगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में व्यापक परिवर्तन आएगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भी स्पष्ट किया कि किसानों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी और उन्हें उचित मुआवजा तथा पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार और जनप्रतिनिधियों के इस संयुक्त प्रयास से धीरे-धीरे किसानों के बीच विश्वास का वातावरण बना और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।
सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 29 नवंबर 2021 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का शिलान्यास किया। यह क्षण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित अनेक वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
शिलान्यास के बाद से परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। रनवे, टर्मिनल और अन्य आधारभूत संरचनाओं का निर्माण जारी है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में अनेक औद्योगिक और निवेश परियोजनाएं भी आकार लेने लगी हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर इकाइयाँ, मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी और औद्योगिक कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण योजनाएँ शामिल हैं। ज़ेवर, जो कभी एक शांत ग्रामीण क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, तेजी से एक वैश्विक आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि दूरदर्शी नेतृत्व, सरकार की प्रतिबद्धता और किसानों के सहयोग से बड़े से बड़ा सपना भी साकार किया जा सकता है।
ज़ेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इसी सामूहिक प्रयास की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को विकास की नई उड़ान देने का मार्ग प्रशस्त किया है।
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