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महिला दिवस पर पीसीओएस, ऑटोइम्यून बीमारियों और देर से मातृत्व के बढ़ते मामलों पर डॉक्टरों ने जताई चिंता

नोएडा बेस्ट/ फेस वार्ता: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यथार्थ अस्पताल, नोएडा एक्सटेंशन में महिलाओं के लिए एक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नोएडा एक्सटेंशन और ग्रेटर नोएडा की विभिन्न आवासीय सोसायटियों की महिलाओं ने भाग लेकर अपने स्वास्थ्य से जुड़े सवाल विशेषज्ञ डॉक्टरों से साझा किए।
सत्र के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिनमें प्रजनन स्वास्थ्य, पीसीओएस, हार्मोनल असंतुलन, ऑटोइम्यून बीमारियां और बढ़ती उम्र में मातृत्व जैसे मुद्दे शामिल रहे। डॉक्टरों ने बताया कि अक्सर महिलाएं शरीर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे समस्या बढ़ने का खतरा रहता है।
यथार्थ अस्पताल, नोएडा एक्सटेंशन में ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर एवं एचओडी डॉ. ज्योति मिश्रा ने कहा कि आजकल ओपीडी में 30 से 40 वर्ष की महिलाओं में पीसीओएस, अनियमित माहवारी, हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित खान-पान और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी एवं रूमेटोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट डॉ. कृति किशोर ने बताया कि ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती हैं और अब 20 से 30 वर्ष की युवतियों में भी इनके मामले बढ़ रहे हैं। उन्होंने महिलाओं को लगातार थकान, जोड़ों में दर्द, बार-बार बुखार या त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की सलाह दी।
ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की कंसल्टेंट डॉ. रोली बंथिया ने कहा कि शहरी लाइफ़स्टाइल के कारण पीसीओएस और माहवारी से जुड़ी अनियमितताएं युवतियों में तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि अगर अत्यधिक दर्द, भारी रक्तस्राव या अनियमित चक्र जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
इन्फर्टिलिटी एवं आईवीएफ की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमरीन सिंह ने कहा कि आजकल कई दंपति शिक्षा, करियर और लाइफ़स्टाइल के कारण देर से परिवार शुरू कर रहे हैं, जिसके चलते प्रजनन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईवीएफ एक समाधान है, लेकिन इसकी सफलता उम्र और सेहत पर निर्भर करती है।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने अपने सवाल पूछे और डॉक्टरों से बातचीत की। विशेषज्ञों ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने शरीर के संकेतों को समझें, नियमित जांच कराएं और किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें।

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