ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता:। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की हड़ताल को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। कर्मचारियों की ओर से सेवाओं के नियमितीकरण की मांग को लेकर 15 जून से शुरू किया गया अनिश्चितकालीन धरना सोमवार को भी जारी रहा। वहीं अस्पताल प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार वार्ता कर गतिरोध समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
संस्थान प्रशासन के अनुसार, हड़ताल शुरू होने के समय अस्पताल में 481 मरीज भर्ती थे, जिनमें 60 से अधिक गंभीर मरीज आईसीयू में और 10 से अधिक मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। अधिकांश मरीज आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से जुड़े हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए जीआईएमएस एक प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्य करता है।अस्पताल प्रशासन का कहना है कि धरना दे रहे कर्मचारियों की मुख्य मांग बिना किसी परीक्षा या चयन प्रक्रिया के उनकी सेवाओं को नियमित करने की है, जबकि ऐसा निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जा सकता है। संस्थान प्रशासन ने कर्मचारियों की मांगों को सहानुभूतिपूर्वक विचार के लिए उत्तर प्रदेश शासन को भेज दिया है, लेकिन फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, धरना समाप्त कराने के लिए अब तक करीब आधा दर्जन दौर की वार्ता हो चुकी है। जिलाधिकारी स्वयं प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दे चुके हैं। जिला प्रशासन ने एक समिति गठित कर मांगों की जांच कराने और रिपोर्ट आने तक नियमित भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित न करने का प्रस्ताव भी दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया।
उधर, मरीजों की परेशानी को देखते हुए संस्थान प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं लगातार संचालित होती रहीं। 20 जून से ओपीडी सेवाएं भी फिर से शुरू कर दी गईं, जहां पहले ही दिन 671 मरीजों का उपचार किया गया। वर्तमान में अस्पताल में 53 मरीज भर्ती हैं।
संस्थान प्रबंधन ने बताया कि सोमवार से अतिरिक्त स्टाफ नर्सों और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए नई आउटसोर्स एजेंसियों से संपर्क किया गया है, ताकि मरीजों को पूर्व की तरह निर्बाध चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। प्रशासन को उम्मीद है कि सोमवार को ओपीडी में लगभग 1000 मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और स्थिति को जल्द सामान्य बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
गौरतलब है कि कर्मचारियों की नियमितीकरण की मांग और प्रशासन की सीमित अधिकार-सीमा के बीच फंसा यह विवाद अब शासन स्तर पर समाधान की ओर देख रहा है, जबकि दूसरी ओर हजारों मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं इस गतिरोध से प्रभावित हो रही हैं।
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