ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: फोर्टिस ग्रेटर नोएडा में स्पाइन की जटिल सर्जरी से मरीजों को मिली राहत
72 डिग्री तक मुड़ी रीढ़ की हड्डी का सफल उपचार, आधुनिक तकनीकों से मरीजों की चलने-फिरने की क्षमता में हुआ सुधार
ग्रेटर नोएडा, 16 अक्टूबर 2026। मेरूदंड यानी रीढ़ की हड्डी की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे चार मरीजों का फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा में सफल उपचार किया गया। इनमें रीढ़ की हड्डी में 72 डिग्री तक टेढ़ापन, गर्दन की डिस्क खिसकने से नसों पर दबाव और कमर से पैर तक तेज दर्द जैसी जटिल समस्याएं शामिल थीं। अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और बहुआयामी चिकित्सा देखभाल के जरिए मरीजों का उपचार किया। उपचार के बाद सभी मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने दोबारा चलना-फिरना शुरू कर दिया।
वर्ल्ड स्पाइन डे के अवसर पर अस्पताल ने इन चार मामलों के माध्यम से रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों की समय पर पहचान, विशेषज्ञों से परामर्श और आधुनिक उपचार तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। उपचार कराने वाले मरीजों की उम्र 16 से 44 वर्ष के बीच थी। इनमें स्कॉलियॉसिस जैसी जटिल विकृति से लेकर नसों पर दबाव के कारण होने वाले गंभीर दर्द तक के मामले शामिल थे।
72 डिग्री तक मुड़ी रीढ़ की हड्डी का किया सफल उपचार
पहले दो मामले कुशीनगर निवासी 20 वर्षीय सिद्धार्थ सिंह और नोएडा निवासी 16 वर्षीय राधिका चंदेला के थे। दोनों स्कॉलियॉसिस से पीड़ित थे। इस बीमारी में रीढ़ की हड्डी असामान्य रूप से एक ओर मुड़ जाती है, जिससे उसका आकार अंग्रेजी के सी (C) या एस (S) अक्षर जैसा दिखाई दे सकता है।
सिद्धार्थ की रीढ़ की हड्डी में 72 डिग्री तक गंभीर टेढ़ापन था, जबकि राधिका की रीढ़ के डॉर्सोलंबर हिस्से में विकृति थी। इस समस्या के कारण उन्हें काफी दर्द का सामना करना पड़ रहा था।
डॉक्टरों ने विस्तृत जांच और विभिन्न विशेषज्ञों की सलाह के बाद दोनों मरीजों की सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान विशेष रॉड और स्क्रू की मदद से रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट सुधारने और उसे स्थिरता प्रदान करने का प्रयास किया गया। सर्जरी के बाद दोनों मरीजों को आवश्यक चिकित्सा देखभाल, रीढ़ को सहारा देने के लिए ब्रेस और विशेषज्ञों की निगरानी में रिकवरी की सुविधा दी गई। उपचार के बाद दोनों ने चलना शुरू कर दिया और उनकी स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया।
गर्दन की डिस्क की सर्जरी से हाथ के दर्द और सुन्नपन में राहत
तीसरा मामला दिल्ली निवासी 44 वर्षीय जतिन त्यागी का था। उनकी गर्दन में रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क खिसकने के कारण नसों पर दबाव पड़ रहा था। इससे उनके बाएं हाथ में तेज दर्द और सुन्नपन की समस्या हो रही थी।
प्रारंभिक उपचार और निगरानी के बाद डॉक्टरों ने उनकी एंटीरियर सर्वाइकल डिस्केक्टॉमी एंड फ्यूजन (एसीडीएफ) सर्जरी की। इस प्रक्रिया में गर्दन के सामने की ओर से चीरा लगाकर प्रभावित डिस्क को हटाया गया। इसके बाद रीढ़ की हड्डियों को स्थिरता देने और उनके जुड़ाव में सहायता के लिए केज, प्लेट, स्क्रू और बोन ग्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया।
सर्जरी के बाद जतिन को हाथ के दर्द से तुरंत राहत मिली और सुन्नपन की समस्या में भी सुधार हुआ। वह जल्द ही खड़े होने लगे और अगले दिन से चलना भी शुरू कर दिया।
छोटे चीरे से एंडोस्कोपिक सर्जरी कर मरीज को दी राहत
चौथा मामला आगरा निवासी 30 वर्षीय गौतम का था। वह कमर के निचले हिस्से में गंभीर दर्द से परेशान थे। दर्द बाएं पैर तक पहुंचता था और इसके साथ सुन्नपन व झनझनाहट भी होती थी। स्थिति इतनी गंभीर थी कि वह पांच मिनट से अधिक चलने में असमर्थ थे।
डॉक्टरों ने हाई-डेफिनिशन एंडोस्कोप की सहायता से छोटे चीरे के जरिए एंडोस्कोपिक डिस्केक्टॉमी की। इस प्रक्रिया में नस पर दबाव डालने वाले डिस्क के हिस्से को हटाया गया, ताकि आसपास के ऊतकों को कम से कम नुकसान पहुंचे।
सर्जरी के बाद गौतम की स्थिति में सुधार हुआ और अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले उन्होंने चलना शुरू कर दिया। यह मामला कम चीरे वाली आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की उपयोगिता को दर्शाता है।
समय पर पहचान और आधुनिक उपचार से बेहतर हो सकती है रिकवरी
फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के निदेशक डॉ. हिमांशु त्यागी ने कहा कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता, स्वतंत्रता और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। युवाओं में स्कॉलियॉसिस से लेकर वयस्कों में नसों पर दबाव के कारण होने वाले असहनीय दर्द तक, प्रत्येक मरीज की समस्या के अनुसार उपचार की योजना बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और कम से कम चीरे वाली प्रक्रियाओं में हुए सुधारों से मरीजों की जरूरतों के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराना संभव हुआ है। हालांकि, बेहतर परिणामों के लिए सर्जरी के साथ व्यक्तिगत फॉलो-अप, विशेषज्ञों की निगरानी और उचित रिकवरी भी महत्वपूर्ण है। वर्ल्ड स्पाइन डे लोगों को रीढ़ की हड्डी की समस्याओं के प्रति जागरूक करने और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने के लिए प्रेरित करने का अवसर है।
विशेषज्ञों की टीम के सामूहिक प्रयास से मिली सफलता
फोर्टिस हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा की फैसिलिटी निदेशक बिंदु शर्मा ने कहा कि चारों मरीजों के उपचार में सर्जिकल, नर्सिंग और अन्य चिकित्सा टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। मरीजों की शुरुआती जांच और सर्जरी की तैयारी से लेकर ऑपरेशन के बाद की देखभाल तक विभिन्न विशेषज्ञों ने समन्वय के साथ काम किया।
उन्होंने बताया कि इमरजेंसी मेडिसिन, गहन चिकित्सा, कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, पीडियाट्रिक्स और इंटरनल मेडिसिन सहित विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने मरीजों की चिकित्सकीय जरूरतों के अनुसार सहयोग दिया। अस्पताल का उद्देश्य रीढ़ की हड्डी से संबंधित जटिल बीमारियों के लिए विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराने के साथ मरीजों और उनके परिवारों को रिकवरी के दौरान आवश्यक सहायता प्रदान करना है।
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