ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता:
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र के 44 गांवों के प्रभावित किसानों ने राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को प्रार्थना-पत्र सौंपकर वर्षों से लंबित 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड (कुल 10 प्रतिशत आबादी भूखंड) के मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
किसानों का कहना है कि वर्ष 2010 के किसान आंदोलन के बाद तत्कालीन सरकार, किसानों और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के बीच 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा तथा 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने पर सहमति बनी थी। इसके बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित वाद के दौरान भी इस सहमति का उल्लेख किया गया था तथा न्यायालय ने न्यायालय न जाने वाले किसानों के संबंध में भी प्राधिकरण को उचित निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
प्रार्थना-पत्र में किसानों ने दावा किया है कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा किसानों से शपथ-पत्र लेकर आश्वासन दिया गया था कि सभी पात्र किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा और 10 प्रतिशत आबादी भूखंड उपलब्ध कराया जाएगा। हालांकि वर्ष 2016 में 10 प्रतिशत आबादी भूखंड संबंधी प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया, जबकि अतिरिक्त मुआवजे का लाभ सभी किसानों को मिल गया।
किसानों का आरोप है कि बाद में प्राधिकरण ने केवल न्यायालय जाने वाले किसानों को ही 10 प्रतिशत आबादी भूखंड देने की बात कही, लेकिन व्यवहार में ऐसे कुछ किसानों को भी इसका लाभ दिया गया जो न्यायालय नहीं गए थे। किसानों ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और अनियमितताओं का आरोप लगाया है।
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 91वीं, 104वीं और 133वीं बोर्ड बैठकों में 10 प्रतिशत आबादी भूखंड संबंधी प्रस्ताव को अनुमोदित कर शासन को भेजा था, लेकिन अंतिम स्वीकृति नहीं मिलने के बावजूद कुछ किसानों को लाभ दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।
किसानों ने जयंत चौधरी से मांग की है कि 44 गांवों के सभी पात्र एवं प्रभावित किसानों को समान रूप से 4 प्रतिशत अतिरिक्त आबादी भूखंड उपलब्ध कराने के लिए शासन स्तर पर आवश्यक पहल की जाए, ताकि वर्षों से लंबित इस विवाद का न्यायसंगत एवं स्थायी समाधान हो सके।
किसानों का कहना है कि इस संबंध में उनके पास विभिन्न दस्तावेज एवं अभिलेख उपलब्ध हैं, जो उनके दावों का समर्थन करते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले में हस्तक्षेप कर हजारों किसान परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में प्रभावी पहल करेंगे।
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