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गुरु पूर्णिमा पर साईं माँ के शिष्यों ने वाराणसी में सेवा, संस्कार और आध्यात्म का दिया संदेश

वाराणसी/ फेस वार्ता30 जुलाई 2026। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर साईं माँ के शिष्यों ने शक्तिधाम आश्रम एवं अस्मिता ट्रस्ट के सहयोग से वाराणसी में आध्यात्म, शिक्षा और सेवा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। शहर के दो प्रमुख स्थलों—शिवाजी मिशन स्कूल, भोजूबीर और अस्मिता सेंटर, सिगरा—में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत भोजूबीर स्थित शिवाजी मिशन स्कूल से हुई, जहां लगभग 300 विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय परिसर में शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से साईं माँ की आरती कर गुरु पूर्णिमा का उत्सव मनाया। इसके पश्चात साईं माँ के नाम पर दस फलदार पौधों का वृक्षारोपण किया गया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
इस अवसर पर सोशल एक्शन एंड रिसर्च सेंटर (SARC) की प्रतिनिधि रंजना गौर सहित विद्यालय के शिक्षक एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शक्तिधाम आश्रम की ओर से देवेश्वर दास ने प्रतिनिधित्व किया।
दोपहर बाद समारोह सिगरा स्थित अस्मिता सेंटर में आयोजित हुआ, जिसका संचालन फादर माथू के नेतृत्व में किया गया। यहां साईं माँ की आरती एवं पूजा-अर्चना के बाद स्थानीय बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया।
सामाजिक सेवा के अंतर्गत 100 जरूरतमंद परिवारों को चावल, आटा, दाल, तेल, नमक और मसालों सहित खाद्य सामग्री के पार्सल वितरित किए गए। साथ ही सभी लाभार्थियों को स्नैक बॉक्स भी प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में साईं माँ की प्रेरणा से संचालित "ड्रीम्स टू डिग्रीज" छात्रवृत्ति योजना से जुड़ी छात्राओं ने भी भाग लिया। इस योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा के लिए सहयोग प्रदान किया जाता है। छात्राओं के साथ उनकी मेंटर अलका और पुष्पा भी उपस्थित रहीं।
गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि गुरु के प्रति श्रद्धा केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के माध्यम से भी व्यक्त की जा सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने साईं माँ के बताए सेवा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
साईं माँ आश्रम के बारे में
परम पावन जगद्गुरु साईं माँ विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं लगभग 2,700 वर्ष पुरानी विष्णुस्वामी परंपरा की प्रथम महिला जगद्गुरु हैं। उनके 20 से अधिक देशों में शिष्य हैं। उनके मार्गदर्शन में काशी, बोधगया सहित भारत के विभिन्न क्षेत्रों में सनातन धर्म, शिक्षा, सेवा और मानव कल्याण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कार्य निरंतर संचालित किए जा रहे हैं।

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