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एनआईईटी फार्मेसी में एआई और फार्मास्युटिकल रिसर्च पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

ग्रेटर नोएडा, फेस वार्ता: नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनआईईटी फार्मेसी इंस्टीट्यूट) में ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (AKTU) द्वारा प्रायोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “फार्मास्युटिकल अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा अभ्यास में एआई की उभरती भूमिकाएँ: आगामी चुनौतियाँ” का गुरुवार को भव्य शुभारंभ हुआ। 17 से 19 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रमुख शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों ने भाग लिया।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. अभिजीत मजूमदार ने अकादमिक उत्कृष्टता और एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि डॉ. अनुज कुमार शर्मा, डीन, एकेटीयू लखनऊ ने एआई को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए एआई एक्सीलेंस सेंटर की स्थापना की योजना साझा की। उन्होंने एआई के विकास के साथ उसके नैतिक और जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया।
उद्योग में एआई के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा
तकनीकी सत्र में टीसीएस (TCS) के एआई विशेषज्ञ डॉ. पंकज भारद्वाज ने पारंपरिक प्रेडिक्टिव एआई और जेनरेटिव एआई (GenAI) के बीच अंतर को विस्तार से समझाया। उन्होंने फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर (FDE) और एआई/एजेंट इंजीनियर जैसे उभरते करियर अवसरों के साथ-साथ लाइफ साइंसेज सप्लाई चेन में एआई के बढ़ते अनुप्रयोगों पर चर्चा की।
ग्रीन केमिस्ट्री में एआई की भूमिका
दिल्ली फार्मास्युटिकल साइंसेज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी (DPSRU) के डॉ. प्रबोध चंद्र शर्मा ने हरित रसायन और एआई के संबंध पर अपने विचार रखे। उन्होंने आइबुप्रोफेन और लेटरमोवीर के हरित संश्लेषण से जुड़े केस स्टडी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि एआई किस प्रकार अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं को गति देने में सहायक हो सकता है।
क्लिनिकल ट्रायल में मानव मूल्यांकन जरूरी
जीआईएमएस के सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन के सीईओ डॉ. राहुल सिंह ने स्वास्थ्य सेवा और क्लिनिकल नवाचार पर चर्चा करते हुए क्लिनिकल डेटा के निरंतर सत्यापन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई क्लिनिकल परीक्षणों की प्रक्रिया को तेज कर सकता है, लेकिन यह मानव-केंद्रित मूल्यांकन और क्लिनिकल ट्रायल्स का विकल्प नहीं हो सकता।
दवा खोज में GenAI से नई संभावनाएं
जामिया हमदर्द की प्रोफेसर डॉ. मयमूना अख्तर ने दवा खोज के क्षेत्र में जेनरेटिव एआई की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि GenAI नए अणुओं की संरचना तैयार करने में मदद कर रहा है, जिससे महीनों में होने वाले कार्य को कुछ ही हफ्तों में पूरा करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने एडीएमईटी (ADMET) गुणों के पूर्वानुमान और फार्माकोविजिलेंस में भी एआई की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की।
जिम्मेदार और नैतिक एआई पर रहा जोर
सम्मेलन के पहले दिन विभिन्न तकनीकी सत्रों में हुई चर्चा से यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि एआई और आधुनिक तकनीकें फार्मास्युटिकल अनुसंधान तथा स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को तेजी से बदल रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि एआई की वास्तविक और टिकाऊ सफलता के लिए उसका जिम्मेदार, पारदर्शी और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है।
तीन दिवसीय सम्मेलन के आगामी सत्रों में फार्मास्युटिकल अनुसंधान, स्वास्थ्य सेवा, दवा खोज, क्लिनिकल नवाचार और एआई से जुड़ी उभरती चुनौतियों पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श जारी रहेगा।

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