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नोएडा एक्सटेंशन के यथार्थ हॉस्पिटल ने किया कमाल आधुनिक EVAR तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने रचा मेडिकल चमत्कार।

नोएडा एक्सटेंशन/ फेस वार्ता, 
आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सूझबूझ ने एक बार फिर असंभव को संभव कर दिखाया। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा एक्सटेंशन के डॉक्टरों ने एक ऐसे 63 वर्षीय मरीज की जान बचाने में सफलता हासिल की, जिसकी बचने की संभावना अस्पताल पहुंचने तक महज 1 प्रतिशत रह गई थी। मरीज को पहले ही 25 यूनिट से अधिक रक्त चढ़ाया जा चुका था और दिल्ली के दो अस्पताल उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाज करने से पीछे हट चुके थे।
लगातार 15 दिनों से पीठ दर्द, कमजोरी और मल के साथ खून आने की शिकायत से जूझ रहे मरीज की जांच में पता चला कि उसे एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म (AAA) था, जिससे एओर्टोएंटरिक फिस्टुला बन गया था। इसी कारण लगातार आंतरिक रक्तस्राव हो रहा था और उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी।
यथार्थ हॉस्पिटल पहुंचते ही मरीज को क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती किया गया। इसके बाद कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS), गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, क्रिटिकल केयर और मेडिसिन विभागों के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से उपचार की रणनीति तैयार की। 20 जून 2026 को मरीज की आधुनिक EVAR (Endovascular Aortic Repair) तकनीक से सफल सर्जरी की गई, जिसके बाद रक्तस्राव पूरी तरह नियंत्रित हो गया।
23 जून को हुई कैप्सूल एंडोस्कोपी में छोटी आंत के अल्सर तेजी से भरते हुए पाए गए और नई ब्लीडिंग नहीं मिली। विशेषज्ञों की सतत निगरानी और उपचार के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट गया।
यथार्थ हॉस्पिटल के डॉ. जीवन पिल्लई, डायरेक्टर, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी ने बताया कि एब्डॉमिनल एओर्टिक एन्यूरिज्म एक बेहद खतरनाक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं। समय पर जांच, सही निदान और आधुनिक EVAR तकनीक के कारण इस मरीज की जान बचाई जा सकी।
वहीं डॉ. हार्दिक आहूजा, कंसल्टेंट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी ने कहा कि एंडोस्कोपी, APC और कैप्सूल एंडोस्कोपी जैसी आधुनिक जांचों से बीमारी के वास्तविक कारण का पता चला। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और CTVS टीम के बेहतर समन्वय से मरीज को नया जीवन मिल सका।
यह सफलता एक बार फिर साबित करती है कि अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों की टीम और समय पर उपचार से सबसे जटिल और गंभीर मरीजों की जान भी बचाई जा सकती है।

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