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जेवर, गौतमबुधनगर/ फेस वार्ता। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भले ही अभी आधिकारिक चुनावी बिगुल न बजा हो, लेकिन गौतमबुद्धनगर की सबसे चर्चित विधानसभा सीट जेवर में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। जेवर विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी से 2022 के प्रत्याशी रहे नेता मनोज चौधरी (तुगलपुर) की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर क्षेत्र की सियासत को गर्मा दिया है।
हाल ही में मनोज चौधरी ने दादरी विधायक मास्टर तेजपाल नागर के साथ भाजपा के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष एवं नव-नियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल से मुलाकात कर उन्हें नई जिम्मेदारी की शुभकामनाएं दीं। हालांकि यह शिष्टाचार भेंट थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संगठन के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके मजबूत संपर्क और बढ़ती सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।
मनोज चौधरी वर्ष 2022 में जेवर विधानसभा से कांग्रेस पार्टी प्रत्याशी रह चुके हैं। चुनाव के बाद भी उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता लगातार बनाए रखी। सामाजिक, धार्मिक और जनहित के कार्यक्रमों में उनकी नियमित भागीदारी के कारण उनका नाम एक बार फिर संभावित दावेदारों की चर्चा में प्रमुखता से लिया जा रहा है।
मनोज चौधरी का परिवार भी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय रहा है। उनके दादा स्वर्गीय चौधरी होराम सिंह गांव के मुखिया रहे, पिता चौधरी महेंद्र सिंह ग्राम प्रधान रहे और उनकी माता ने भी ग्राम प्रधान के रूप में गांव का नेतृत्व किया। परिवार के अन्य सदस्य भी जिला पंचायत और नगर पंचायत जैसे जनप्रतिनिधि पदों पर रह चुके हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार संपर्क उन्हें मजबूत दावेदारों में शामिल करता है। सांसद डॉ. महेश शर्मा, विधायक मास्टर तेजपाल नागर, प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनीवाल और वरिष्ठ संगठन नेता सुनील बंसल के साथ उनकी राजनीतिक सहभागिता लगातार चर्चा में रही है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास और बड़े निवेशों के कारण जेवर विधानसभा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भाजपा समेत सभी दल इस सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रहे हैं।
हालांकि भाजपा ने अभी किसी भी उम्मीदवार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मनोज चौधरी की लगातार बढ़ती सक्रियता ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि जेवर की चुनावी राजनीति में उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। अब सभी की निगाहें भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के आगामी फैसले पर टिकी हैं।
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