स्कूल मैनेजमेंट बॉडी के डॉ. तारसीम चंद्र, आर.एस. अग्रवाल एवं विद्यार्थियों ने भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। सभी ने पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लेते हुए 'एक पेड़, एक जीवन' का संदेश दिया।
ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता भारत भूषण शर्मा:। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के बीच पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से श्योराण इंटरनेशनल स्कूल ने 'वन महोत्सव' के अवसर पर गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के गेट नंबर-1 स्थित ग्रीन बेल्ट में भव्य पौधारोपण अभियान चलाया। अभियान के तहत नीम, पीपल, आम, जामुन, डहेलिया सहित विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों पौधे रोपे गए। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बनाने का आह्वान किया गया।
पौधारोपण कार्यक्रम में स्कूल के चेयरमैन उदयवीर श्योराण ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण ही आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे हर वर्ष कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी निभाएं। उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जैव विविधता, जल संरक्षण और संतुलित पर्यावरण के भी आधार हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के डीजीएम (हॉर्टिकल्चर) संजय जैन ने कहा कि शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने श्योराण इंटरनेशनल स्कूल की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि शैक्षणिक संस्थान इसी तरह पर्यावरण संरक्षण के अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव तेजी से दिखाई देगा।
स्कूल मैनेजमेंट बॉडी के डॉ. तारसीम चंद्र और आर.एस. अग्रवाल ने भी विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण तभी सफल माना जाएगा, जब लगाए गए पौधों का संरक्षण और नियमित देखभाल भी सुनिश्चित की जाए।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ पौधे लगाए और उन्हें संरक्षित रखने का संकल्प लिया। स्कूल परिसर में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए सभी ने 'एक व्यक्ति–एक पौधा' अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान किया।
श्योराण इंटरनेशनल स्कूल ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े ऐसे अभियान भविष्य में भी लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो और समाज को हरित एवं स्वच्छ बनाने में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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