ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: Sharda University के सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी (CIF) द्वारा “एडवांस्ड समर ट्रेनिंग प्रोग्राम-2026” का सफल शुभारंभ किया गया है। यह विशेष कौशल-विकास कार्यक्रम छात्रों, शोधार्थियों और युवा वैज्ञानिकों को आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों तथा गुड लैबोरेटरी प्रैक्टिस (GLP) आधारित अनुसंधान तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम 1 जून से शुरू होकर 15 जुलाई 2026 तक संचालित होगा।
उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. Sibaram Khara तथा शोध संकाय के डीन Prof. Bhuvnesh Kumar ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान में प्रयोगात्मक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को यूवी–विज़िबल स्पेक्ट्रोफोटोमीटर (UV–Vis), एटॉमिक एब्जॉर्प्शन स्पेक्ट्रोस्कोपी (AAS), एक्स-रे डिफ्रैक्शन (XRD) और हाई-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) जैसे अत्याधुनिक उपकरणों के संचालन, विश्लेषण और डेटा इंटरप्रिटेशन का व्यावहारिक अनुभव कराया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें वास्तविक शोध परियोजनाओं के माध्यम से आधुनिक विश्लेषणात्मक विज्ञान की बारीकियों से भी अवगत कराया जा रहा है।
कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने बताया कि कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत विश्लेषणात्मक मानकों और कार्यप्रणालियों पर आधारित है। प्रतिभागियों को यूनाइटेड स्टेट्स फार्माकोपिया (USP), ब्रिटिश फार्माकोपिया (BP) और इंडियन फार्माकोपिया (IP) के मानकों के अनुरूप पैरासिटामोल, इबुप्रोफेन, एटेनोलोल और एल्बेंडाजोल जैसी औषधियों के विश्लेषण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं खाद्य विश्लेषण प्रशिक्षण ISO, BIS, AOAC International तथा Food Chemicals Codex के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है, जिसमें बिस्कुट जैसे खाद्य उत्पादों को मॉडल नमूनों के रूप में शामिल किया गया है।
इस अवसर पर प्रो. भुवनेश कुमार ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम युवाओं को वैज्ञानिक अनुसंधान, फार्मास्युटिकल विश्लेषण, खाद्य गुणवत्ता परीक्षण और औद्योगिक गुणवत्ता आश्वासन जैसे क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।
कार्यक्रम का समन्वयन CIF के प्रमुख Dr. Atul Kumar Gupta के नेतृत्व में किया जा रहा है। वहीं Dr. Afsar Ali प्रतिभागियों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण सहायता प्रदान कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का मानना है कि यह पहल युवा शोधकर्ताओं को उद्योग-उन्मुख तकनीकी एवं विश्लेषणात्मक कौशल से सशक्त बनाते हुए शोध और नवाचार की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी।
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