ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता, 27 अक्टूबर 2026। गंभीर बीमारियों और बढ़ती उम्र के बावजूद 72 वर्षीय मरीज के लिवर में मौजूद 10 से 12 सेंटीमीटर के बड़े ट्यूमर की सफल सर्जरी कर डॉक्टरों ने जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को अंजाम दिया। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा की टीम ने पूरी तरह लैप्रोस्कोपिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मरीज के लिवर का दाहिना हिस्सा निकाल दिया। अस्पताल के अनुसार, क्षेत्र में इस तरह की पूरी तरह मिनिमली इनवेसिव सर्जरी अपनी तरह की पहली उपलब्धि है।
इस मामले में चुनौती केवल ट्यूमर का बड़ा आकार नहीं था, बल्कि मरीज का लिवर सिरोसिस से प्रभावित होना और टाइप-2 डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से जूझना भी था। ऐसी स्थिति में कैंसरग्रस्त हिस्से को निकालने के साथ लिवर के शेष स्वस्थ हिस्से की कार्यक्षमता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण था।
नौ महीने से पेट दर्द की थी शिकायत
आगरा के धनौली निवासी मनोहर सिंह पिछले करीब नौ महीने से पेट दर्द की समस्या से परेशान थे। जून 2026 के दूसरे सप्ताह में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। विस्तृत चिकित्सकीय जांच और ट्रिपल-फेज सीटी स्कैन में उनके लिवर के दाहिने हिस्से में लगभग 10 से 12 सेंटीमीटर का अनियमित आकार का ट्यूमर पाया गया। उपलब्ध चिकित्सकीय विवरण के अनुसार, इसे स्टेज-3 के रूप में वर्गीकृत किया गया।
मरीज की उम्र और पहले से मौजूद बीमारियों को देखते हुए ऑपरेशन से पहले उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति, हृदय एवं फेफड़ों की कार्यक्षमता और लिवर के शेष हिस्से की क्षमता का आकलन किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने सर्जरी की विस्तृत योजना तैयार की।
छह से सात घंटे चला ऑपरेशन
डॉक्टरों ने जनरल एनेस्थीसिया के तहत डायग्नोस्टिक लैप्रोस्कोपी, लैप्रोस्कोपिक राइट हेपेटेक्टॉमी यानी लिवर के दाहिने हिस्से को निकालने की सर्जरी और कोलेसिस्टेक्टॉमी यानी पित्ताशय निकालने की प्रक्रिया पूरी की। ऑपरेशन लगभग छह से सात घंटे तक चला। इस दौरान करीब 200 मिलीलीटर रक्तस्राव हुआ और अस्पताल के विवरण के मुताबिक, सर्जरी के दौरान या बाद में कोई सर्जिकल जटिलता सामने नहीं आई।
ऑपरेशन के बाद निकाले गए ऊतक की हिस्टोपैथोलॉजी जांच में मॉडरेटली डिफरेंशिएटेड एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि हुई। जांच में सर्जिकल मार्जिन कैंसर-मुक्त पाए गए, यानी निकाले गए ऊतक के किनारों पर कैंसर नहीं मिला।
सर्जरी के बाद मरीज की हालत में हुआ सुधार
ऑपरेशन के बाद मरीज को दो दिनों तक आईसीयू में निगरानी में रखा गया। 17 जून को उन्हें वेंटिलेटर से हटा दिया गया। इसके बाद अगले चार से पांच दिनों में उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने अच्छी रिकवरी की। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, फिलहाल मरीज को अतिरिक्त कैंसर उपचार की आवश्यकता नहीं बताई गई है।
जटिल मामलों में सटीक योजना बेहद जरूरी: डॉ. मनोज गुप्ता
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, ओमेगा-1, ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक एवं लैप्रोस्कोपिक जीआई सर्जरी, जीआई ऑन्कोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि बुजुर्ग मरीजों में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और लिवर सिरोसिस जैसी समस्याएं बड़ी सर्जरी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। ऐसे मामलों में ऑपरेशन से पहले सावधानीपूर्वक योजना बनाना और सर्जरी के दौरान तथा बाद में लगातार निगरानी रखना जरूरी होता है।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, इस मरीज के लिवर में बड़ा ट्यूमर होने के साथ कई अन्य चिकित्सकीय चुनौतियां भी थीं। टीम के सामने कैंसरग्रस्त हिस्से को निकालने और लिवर के शेष हिस्से की कार्यक्षमता सुरक्षित रखने की दोहरी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि पूरी तरह मिनिमली इनवेसिव लैप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करना और मरीज की अच्छी रिकवरी इस मामले की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
यह मामला दर्शाता है कि जटिल स्वास्थ्य स्थितियों वाले मरीजों में भी विस्तृत जांच, उचित सर्जिकल योजना और विशेषज्ञों की टीम के समन्वित प्रयास से चुनौतीपूर्ण उपचार संभव हो सकता है।
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