ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता, 27 अक्टूबर। सुरक्षित, पौष्टिक और टिकाऊ भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ भविष्य की खाद्य चुनौतियों का समाधान खोजने के उद्देश्य से शारदा विश्वविद्यालय में विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के आहार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में खाद्य सुरक्षा, पोषण, वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि विज्ञान, आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय से भविष्य की खाद्य जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकता है।
कार्यक्रम की थीम ‘आज नवाचार, कल पोषण’ (Innovate Today, Nourish Tomorrow) रही। इसके माध्यम से भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ खाद्य अपव्यय को कम करने तथा पर्यावरण के अनुकूल खाद्य प्रणालियां विकसित करने पर जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने पोस्टर मेकिंग और रंगोली के माध्यम से पौष्टिक खानपान, खाद्य सुरक्षा और भोजन की बर्बादी रोकने का संदेश दिया।
वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में AFSTI दिल्ली चैप्टर की ट्रेजरर एवं खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. विपाशा तनेजा उपस्थित रहीं। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और पारंपरिक कृषि ज्ञान के समन्वय से खाद्य क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने, कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने और खाद्य उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही बेहतर भंडारण, आधुनिक पैकेजिंग तकनीकों और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में नई तकनीकों के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. विपाशा तनेजा ने कहा कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने से सुनिश्चित नहीं होगी, बल्कि इसके लिए नवाचार, विज्ञान और सतत विकास के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। खाद्य अपव्यय कम करने, पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के विकास में युवाओं एवं शोधकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि भोजन केवल बुनियादी आवश्यकता नहीं, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर जीवन की नींव है। भोजन की गुणवत्ता, सुरक्षा और उपलब्धता को प्राथमिकता देकर ही स्वस्थ समाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: प्रो. अमित कुमार सिंह
शारदा स्कूल ऑफ बायो-साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के डीन प्रो. अमित कुमार सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल किसानों या खाद्य उद्योग तक सीमित नहीं है। इसके लिए वैज्ञानिकों, शैक्षणिक संस्थानों, नीति-निर्माताओं और आम लोगों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसी खाद्य व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित रख सके। शारदा विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से सतत विकास को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करना मानवता के बेहतर भविष्य की बुनियाद है।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि इस दिशा में किए जाने वाले प्रयास किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी सहायक हो सकते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संयोजक प्रो. पीतम चंद्र, सह-संयोजक डॉ. रंजना पांडे और डॉ. दिनकर बी. कांबले सहित आयोजन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाली पूरी टीम के प्रयासों की सराहना की।
एक टिप्पणी भेजें