कुरुक्षेत्र/फेस वार्ता: “जहां गीता का संदेश गूंजा, वहीं सृजन के अक्षर फिर से जागेंगे” — इसी भाव के साथ शिला अक्षर फाउंडेशन, दिल्ली द्वारा धर्मभूमि कुरुक्षेत्र स्थित अखंड गीतापीठ शाश्वत सेवाश्रम ट्रस्ट में आयोजित “षष्ठ वार्षिकोत्सव 2026” गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और सनातन चेतना को समर्पित इस राष्ट्रीय आयोजन में देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, कवियों, समाजसेवियों एवं विद्वानों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती वंदना के साथ हुआ। पूरे सभागार में भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और साहित्यिक चेतना का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों पर हुई सारगर्भित चर्चा
प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी शाश्वत आनंद गिरि महाराज रहे, जबकि अध्यक्षता डॉ. एस.पी. शर्मा ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में ललित भूषण, प्रो. डॉ. पूनम अग्रवाल, कुमुद शुक्ला, मधुर कुलश्रेष्ठ एवं डॉ. अनुज भार्गव उपस्थित रहे। वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति, श्रीमद्भगवद्गीता, शिक्षा, लोकजीवन और मानवीय मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलिमा निर्भीक एवं श्वेता शर्मा ने किया। डॉ. नीलिमा निर्भीक ने अपने व्याख्यान में युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों से जुड़ने का संदेश दिया।
“पौराणिक साहित्य एवं श्रीमद्भागवत पुराण” पुस्तकों का लोकार्पण
द्वितीय सत्र में आयोजित भव्य काव्य गोष्ठी के दौरान डॉ. नीलिमा निर्भीक और मनोज कुमार राणा द्वारा संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक “पौराणिक साहित्य एवं श्रीमद्भागवत पुराण” भाग-1 एवं भाग-2 का लोकार्पण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता कुमार दत्त ‘कुंवर’ ने की।
मुख्य अतिथि डॉ. आरती वाजपेयी तथा विशिष्ट अतिथि सुंदर जायसवाल ‘सबरस’, सुरेश सोनपुरे ‘अजनबी’, डॉ. अनिल शर्मा ‘मयंक’ एवं डॉ. मृदुला त्यागी ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काव्य संध्या में बिखरे साहित्यिक रंग
तृतीय सत्र में आयोजित भव्य काव्य संध्या ने पूरे वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। इस सत्र की अध्यक्षता नीलम कुलश्रेष्ठ ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. कुमार आदित्य उपस्थित रहे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर सुमन शर्मा, डॉ. आरती शर्मा, अर्चना सिंह, डॉ. मोनिका रानी एवं डॉ. ब्रजलता शर्मा ने प्रभावशाली काव्य पाठ प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
साहित्य साधकों का हुआ सम्मान
संस्था की अध्यक्ष डॉ. ब्रजलता शर्मा ने स्वागत उद्बोधन एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, साहित्यकारों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। संस्था के चेयरमैन रमेश चंद्र शर्मा ने साहित्य साधकों को प्रमाण पत्र, अंगवस्त्र एवं “साहित्य गौरव सम्मान” प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह का समापन भारत माता, धर्मभूमि कुरुक्षेत्र और भारतीय संस्कृति के जयघोष तथा राष्ट्रगान के साथ हुआ। संस्था के पदाधिकारी निखिल गौड़ ने कहा कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और मानवीय मूल्यों की जड़ें आज भी समाज को नई दिशा देने में सक्षम हैं।
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