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एमिटी क्वांटम मिशन’’ वेबसाइट को किया गया लांच

नोएडा/ फेस वार्ता भारत भूषण शर्मा: क्वांटम प्रौद्योगिकी में हुई हालिया प्रगति पर चर्चा करने के लिए अग्रणी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और उद्योग के हितधारकों को मंच प्रदान करने हेतु एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन द्वारा क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवीनतम प्रगति विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का शुभारंभ डीआरडीओ के वैज्ञानिक (जी) डा पूर्णेंदु चतुर्वेदी, एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान, सी- डॉट के सीओई क्वांटम टेक्नोलॉजीस के प्रमुख एवं वैज्ञानिक (जी) अतुल गुप्ता, क्यूबीट फोर्स के सीइओ डा एल वेंकट सुब्रमण्यम, डीआरडीओ यंग सांइटिस्ट लैबोरेटरी के निदेशक डा सांतु सरदार, सी डैक नोएडा के वैज्ञानिक (एफ) एंव एसोसिएट निदेशक डा अभिषेक तिवारी और एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती द्वारा किया गया। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा एमिटी क्वांटम मिशन की वेबसाइट को लांच किया गया।
डीआरडीओ के वैज्ञानिक (जी) डा पूर्णेंदु चतुर्वेदी ने कहा कि आज के समय में क्वांटम प्रौद्योगिकी बहुत ज्यादा अहम है। इसमें सुपरपोज़िशन, एंटैंगलमेंट और इंटरफेरेंस जैसे सिद्धांत शामिल हैं, जिनसे ऐसी क्षमताएँ पैदा होती हैं जो पांरपरिक प्रणाली के लिए नामुमकिन हैं। यह सिर्फ़ ‘‘तेज़ कंप्यूटिंग’’ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से नए वैज्ञानिक और आर्थिक क्षेत्र खोलती है। क्वांटम प्रौद्योगिकी, पारंपरिक कंप्यूटिंग के मुकाबले प्रोसेसिंग की रफ़्तार को कई गुना बढ़ा देगी और 10 सालों के अंदर हर अहम आर्थिक क्षेत्र पर असर डालेगी। उम्मीद है कि ये नए आविष्कार हज़ारों नौकरियाँ पैदा करेंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगे। युवाओं को आगे आना चाहिए और क्वांटम प्रौद्योगिकी पर आधारित नए आविष्कारों पर काम करना चाहिए। कई रुकावटों को दूर करने की ज़रूरत है, और युवाओं को ज़मीन से जुड़ा रहना चाहिए और क्वांटम टेक्नोलॉजी में अपना योगदान देते रहना चाहिए।
एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान ने संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी अनुसंधान व नवचार के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है। एमिटी का उददेश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है, जो हमारे देश को दुनिया के बाकी सभी देशों से आगे ले जाएंगे। भारत के पास दुनिया के सबसे बेहतरीन दिमाग हैं, लेकिन हमें एक ‘‘प्रोडक्ट नेशन’’ बनने की ज़रूरत है। समाज के फ़ायदे के लिए अनुसंधान के इस्तेमाल और ज़रूरतों के आधार पर विश्लेषण की ज़रूरत है। एमिटी में स्कूली छात्र भी इनोवेशन कर रहे हैं और उन्होंने पेटेंट भी फ़ाइल किए हैं, जो तारीफ़ के काबिल है। उन्होंने क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 30 फ़ेलोशिप की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने ‘‘एमिटी क्वांटम मिशन’’ वेबसाइट भी लॉन्च की।।
सी- डॉट के सीओई क्वांटम टेक्नोलॉजीस के प्रमुख एवं वैज्ञानिक (जी) श्री अतुल गुप्ता ने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी कोई नई चीज़ नहीं है; इसकी खोज 125 साल पहले हुई थी। पहली क्वांटम क्रांति 1940 के दशक में हुई थी, जिसमें ट्रांजिस्टर, सेमीकंडक्टर, लेज़र, सोलर सेल वगैरह शामिल थे। दूसरी क्रांति अभी हो रही है, जिसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम मटीरियल शामिल हैं। इसकी वजह से कंप्यूटेशन, कम्युनिकेशन, सेंसिंग और डिवाइस टेक्नोलॉजी में एक बड़ा बदलाव आया है। क्वांटम टेक्नोलॉजी में अचानक आई तेज़ी की वजह टेक्नोलॉजी में हुई तरक्की और ड्रग डिस्कवरी, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने, क्लाइमेट मॉडलिंग और मौसम के पूर्वानुमान, फाइनेंशियल रिस्क मॉडलिंग और कई दूसरे क्षेत्रों में क्वांटम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल है। नेशनल क्वांटम मिशन के तहत, सरकार क्वांटम अनुसंधान व विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और इकोसिस्टम बनाने में सक्रिय रूप से निवेश कर रही है। क्वांटम टेक्नोलॉजी को एआईसीटीई के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, और अलग-अलग संस्थानों में भारत के लिए क्वांटम टैलेंट तैयार करने के लिए स्नातक और स्नातोत्तर पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं।क्यूबीट फोर्स के सीइओ डा एल वेंकट सुब्रमण्यम ने कहा कि सभी मोबाइल चिप भारतीयों द्वारा डिज़ाइन किए जाते हैं और क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के पास सबसे बड़ा प्रतिभा का भंडार है। हालाँकि, भारत में उत्पादों की कमी है। नेशनल क्वांटम मिशन के तहत, हमारा लक्ष्य क्वांटम प्रौद्योगिकी में एक जीवंत इकोसिस्टम बनाना और स्वदेशी टेक्नोलॉजी विकसित करके भारत को एक ‘‘क्वांटम उड़ान’’ देना है। जिन देशों के पास क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सलाहकार और वैज्ञानिक होंगे, वे दुनिया का नेतृत्व करेंगे। सरकार स्टार्टअप्स के लिए 25 करोड़ रुपये की फंडिंग दे रही है। एमिटी जैसे संस्थानों को आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए और नई प्रतिभाओं को नई प्रौद्योगिकी विकसित करनी चाहिए, जो भारत को एक विकसित देश बनाएगी।
डीआरडीओ यंग सांइटिस्ट लैबोरेटरी के निदेशक डा सांतु सरदार ने कहा कि डीआरडीओ उत्पादों में विशेषज्ञता हासिल करने पर काम कर रहा है ताकि उनके इस्तेमाल में तेज़ी लाई जा सके। साथ ही, जैसे-जैसे तकनीक परिपक्व होती जाएगी, यह आयात के विकल्प के तौर पर भी तकनीकें विकसित करेगा। इसलिए, यह उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ रहा है, ‘‘नेशनल क्वांटम मिशन’’ के साथ समन्वय कर रहा है, और कुशल वैज्ञानिकों को तैयार कर रहा है। डीआरडीओ यंग साइंटिस्ट्स लैब फॉर क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ की स्थापना वर्ष 2019 में की गई थी। क्त्क्व् शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के साथ मिलकर काम कर रहा है, और संयुक्त गतिविधियों को विस्तार देने पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके अलावा, यह जेआरएफ और अनुसंधान सहायक को सशुल्क इंटर्नशिप के अवसर प्रदान कर रहा है, और उन्हें रोज़गार के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने युवा और महत्वाकांक्षी वैज्ञानिकों से डीआरडीओ में शामिल होने और राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
सी डैक नोएडा के वैज्ञानिक (एफ) एंव एसोसिएट निदेशक डा अभिषेक तिवारी ने सुपरकंप्यूटर पर क्वांटम कंप्यूटिंग को सक्षम करने के लिए क्वांटम त्वरक की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि क्वांटम त्वरक की ज़रूरत इसलिए है, क्योंकि पांरपरिक कंप्यूटर समस्याओं को तेज़ी से हल नहीं कर पाते। इसके अलावा, फ़िज़िकल क्वांटम कंप्यूटर महंगे होते हैं, उनमें गलतियों की गुंजाइश अधिक होती है और वे सीमित होते हैं। हमारे देश में शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए क्वांटम हार्डवेयर तक स्वदेशी पहुँच की कमी है। जब क्वांटम कंप्यूटिंग में क्वांटम त्वरक का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह प्रक्रिया को तेज़ और काम को आसान बना देता है।
एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने स्वागत करते हुए कहा कि यह ज्ञानवर्धक संगोष्ठी उभरते रुझानों पर विचार-विमर्श करेगी, आपसी सहयोग को बढ़ावा देगी और शिक्षा जगत, उद्योग तथा सरकार के बीच क्वांटम इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाएगी। डीआरडीओ, आईबीएम क्वांटम, क्यूएनयू लैब्स, एनएक्पी सेमीकंडक्टर, सी - डैक जैसे प्रतिष्ठित संगठन और अग्रणी शैक्षणिक संस्थान इस संगोष्ठी में भाग ले रहे हैं, जो शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग के सशक्त मेल को दर्शाता है।इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डा वी के जैन, एमिटी स्कूल ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नेालॉजी की डा नताशा हस्तीर आदि उपस्थित थे।तकनीकी सत्र के अंर्तगत के क्वांटम टेक्नोलॉजीज़ में नेतृत्व के लिए उद्योग-शिक्षा-सरकार साझेदारी पर परिचर्चा सत्र, आईआरएल के आईबीएम क्वांटम के किस्किट डेवलपर श्री शोभीत पंाडेय द्वारा किस्किट प्रदर्शन सत्र का आयोजन किया गया।

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