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ग्लोबल भागीदारी के साथ शारदा विश्वविद्यालय में “नॉलेज ग्राफ एवं सेमांटिक वेब” पर 6वां विंटर स्कूल सम्पन्न।

ग्रेटर नोएडा, फेस वार्ता: उभरती एआई तकनीकों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शारदा विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एआई इन मेडिसिन, इमेजिंग एंड फॉरेंसिक्स (CAIMIF) ने “नॉलेज ग्राफ एवं सेमांटिक वेब” विषय पर 6वां विंटर स्कूल 2026 सफलतापूर्वक आयोजित किया। 30 घंटे के इस गहन ऑनलाइन अकादमिक कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रतिभागियों को अत्याधुनिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) भुवनेश कुमार और CAIMIF प्रमुख प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार की उपस्थिति में हुआ। पाठ्यक्रम की रूपरेखा डॉ. संजू तिवारी द्वारा तैयार की गई, जिन्होंने आरडीएफ, आरडीएफएस, ओडब्ल्यूएल, स्पार्क्यूएल, ऑंटोलॉजी इंजीनियरिंग और सेमांटिक रीजनिंग जैसे विषयों पर विस्तार से सत्र लेकर प्रतिभागियों को मूलभूत से उन्नत स्तर तक प्रशिक्षित किया।
इस विंटर स्कूल की खासियत इसकी अंतरराष्ट्रीय भागीदारी रही। University of Southern California, Leibniz University Hannover, IBM, Minerva CQ और Cognizant से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को वैश्विक शोध और उद्योग के अनुभवों से रूबरू कराया। साथ ही आयोजित हैंड्स-ऑन कोडिंग सत्रों ने सीखने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया।
कार्यक्रम में IIT Delhi, IIT Roorkee, IIT BHU, IIIT Delhi, NIT Kurukshetra, NIT Karnataka, ISI Bangalore और Manipal University Bengaluru सहित देश के प्रमुख संस्थानों से 48 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके अलावा यूरोप, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और एशिया के विभिन्न देशों से भी प्रतिभागियों की भागीदारी ने इसे एक वैश्विक अकादमिक मंच का रूप दिया।
डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) भुवनेश कुमार ने कहा कि “नॉलेज ग्राफ और सेमांटिक रीजनिंग भविष्य की एआई प्रणालियों की नींव हैं। इस विंटर स्कूल का उद्देश्य प्रतिभागियों को स्पष्ट अवधारणात्मक समझ देना और उन्हें शोध के लिए प्रेरित करना था।”
वहीं, University of Southern California से जुड़े डॉ. मयंक केजरीवाल ने प्रतिभागियों की सक्रियता और चर्चाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि को दर्शाते हैं और भारत को इस क्षेत्र में मजबूत बनाते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजकों ने इसे ज्ञान-विनिमय और शोध सहयोग की दिशा में एक सफल पहल बताते हुए भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता 

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