ग्रेटर नोएडा, फेस वार्ता: जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (GLBIMR) में एनएचआरडीएन दिल्ली एंड एनसीआर चैप्टर के सहयोग से एचआर कॉन्क्लेव 2026 का सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष कॉन्क्लेव की थीम “द फ्यूचर ऑफ वर्क: बिल्डिंग एजाइल, स्किल-फर्स्ट ऑर्गेनाइजेशन” रही। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भविष्य के कार्यस्थल में पीपल, पर्पस और परफॉर्मेंस की भूमिका के साथ युवाओं के लिए बदलते रोजगार परिदृश्य और आवश्यक कौशलों पर विचार साझा किए।
कॉन्क्लेव में जीएल बजाज एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के वाइस चेयरमैन एवं चीफ पैट्रन पंकज अग्रवाल, जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च की निदेशक एवं पैट्रन डॉ. सपना राकेश, मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं सीएचआरओ सालिल लाल तथा एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के हेड-एचआर विजय रंजन सिंह सहित देश की अग्रणी कंपनियों के एचआर विशेषज्ञ मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। एनएचआरडीएन की ओर से वीर भारत ने कार्यस्थल पर अनुशासन और कोड ऑफ कंडक्ट के महत्व पर प्रकाश डाला। निदेशक डॉ. सपना राकेश ने स्वागत संबोधन दिया, जबकि एनएचआरडीएन नेतृत्व की ओर से सालिल लाल ने उद्घाटन संबोधन किया।
विजय रंजन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि डिग्री केवल अवसर तक पहुंचने का माध्यम है, जबकि उस अवसर को हासिल करने और आगे बढ़ने के लिए कौशल जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से एआई से डरने के बजाय उसे अपनी सोच और क्षमता को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रील की चमक और आर्थिक आत्मनिर्भरता के बीच का अंतर समझना ही वास्तविक करियर की दिशा तय करता है।
सालिल लाल ने अपने 35 वर्षों के अनुभव साझा करते हुए युवाओं को निष्पक्ष, तेज और दृढ़ रहने का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि एक लीडर की सबसे बड़ी सफलता केवल स्वयं सफल होना नहीं, बल्कि अपने बाद नए लीडर्स तैयार करना है।
चीफ पैट्रन पंकज अग्रवाल ने कहा कि जीएल बजाज में हमेशा से डिग्री से आगे बढ़कर रोजगार-योग्य प्रतिभा तैयार करने पर जोर दिया जाता है। एआई और रील के दौर में युवाओं को समझना होगा कि टेक्नोलॉजी एक टूल है, मंजिल नहीं। वास्तविक मंजिल स्किल, सोच और चरित्र है।
दो सत्र रहे आकर्षण का केंद्र
कॉन्क्लेव में आयोजित “नौकरी से कौशल तक” पैनल डिस्कशन में वीर भारत, हेड एचआर बिजनेस पार्टनर, यामाहा मोटर सॉल्यूशंस इंडिया; मुक्ता खन्ना, एम्प्लॉयबिलिटी रिलेशनशिप मैनेजर, वनस्टेप ग्लोबल; तथा अग्निवेश ठाकुर, बिजनेस एंड टेक्नोलॉजी लीडर, एक्सेंचर ने विचार साझा किए। सत्र का संचालन आशुतोष, टैलेंट मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट ने किया।
दूसरे सत्र “फ्यूचर टैलेंट एक्विजिशन” में एनएचआरडीएन दिल्ली एंड एनसीआर चैप्टर के वाइस प्रेसिडेंट प्रद्युमन पांडे और एरिक्सन के हेड टैलेंट एक्विजिशन (साउथ ईस्ट एशिया, ओशिनिया एंड इंडिया) धीरज मोदी ने भविष्य की भर्ती प्रक्रिया और टैलेंट की बदलती जरूरतों पर चर्चा की। सत्र की मेजबानी जीएलबीआईएमआर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. यगबाला कपिल ने की।
विशेषज्ञों ने एकमत से कहा कि कॉर्पोरेट जगत में अब केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। कंपनियां स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग, लीडरशिप और बदलाव के साथ खुद को ढालने की क्षमता को अधिक महत्व दे रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित क्विज एवं केस रोल-प्ले प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने कॉर्पोरेट जगत से जुड़ी चुनौतियों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली तीन टीमों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कॉन्क्लेव को सफल बनाने में चेयरपर्सन आनंद कुमार राय, डॉ. निधि श्रीवास्तव, डॉ. यगबाला कपिल, डॉ. पूजा सिंह, डॉ. राशि चौधरी और डॉ. अरविंद भट्ट सहित पूरी आयोजन टीम का विशेष योगदान रहा।
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