Top News

ग्लोबल आइकॉनिक लीडरशिप अवार्ड" से सम्मानित; युवाओं से कौशल, नवाचार और नेतृत्व की राह पर चलने का आह्वान: डॉ. आत्माराम पांडुरंग पवार ।

"स्वदेशी शक्तियों से ही बनेगा विकसित भारत": लॉयड ग्रुप (फार्मेसी) में ग्लोबल लीडरशिप टॉक
ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता, 29 अक्टूबर 2026। लॉयड ग्रुप (फार्मेसी) द्वारा "वॉइसेज़ दैट शेप टुमारो" श्रृंखला के अंतर्गत "ग्लोबल लीडरशिप टॉक" का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय "स्ट्रेंथनिंग द इंडिजिनस स्ट्रेंथ्स फॉर विकसित भारत" (विकसित भारत के लिए स्वदेशी शक्तियों को सुदृढ़ करना) रहा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. आत्माराम पांडुरंग पवार, प्राचार्य, पूना कॉलेज ऑफ फार्मेसी एवं डीन, फैकल्टी ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, भारती विद्यापीठ, पुणे रहे। फार्मेसी शिक्षा और संस्थान-निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लॉयड ग्रुप की ओर से उन्हें "ग्लोबल आइकॉनिक लीडरशिप अवार्ड" से सम्मानित किया गया।

विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए डॉ. पवार ने भारत की गौरवशाली शैक्षिक विरासत का स्मरण कराया। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों तथा महाभारत काल के गुरुकुलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत कभी विश्व का ज्ञान-केंद्र रहा है। संस्कृत के महान वैयाकरण पाणिनि का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय विद्वत्ता की गहराई को रेखांकित किया। आयुर्वेद की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पुरानी यह चिकित्सा पद्धति आज भी उपचार की अग्रिम पंक्ति में अपेक्षित स्थान नहीं पा सकी है, जबकि इसमें अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित न रहकर कौशल-विकास पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया। महात्मा गांधी की समग्र शिक्षा की अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि हाथ, हृदय और बुद्धि के संतुलित विकास का माध्यम होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नवाचार और नेतृत्व-गुणों के विकास का आह्वान करते हुए कहा कि जड़ों से जुड़कर ही वैश्विक नेतृत्व किया जा सकता है।
वर्ष 1905 के स्वदेशी आंदोलन ने भारत में आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की जो चेतना जगाई, वही आज "आत्मनिर्भर भारत", "मेक इन इंडिया" और "वोकल फॉर लोकल" जैसे अभियानों के रूप में "स्वदेशी 2.0" की दिशा में आगे बढ़ रही है। फार्मेसी क्षेत्र में भी भारत ने बीते दशकों में सराहनीय प्रगति की है। किफायती जेनेरिक दवाओं और टीकों की आपूर्ति के कारण भारत को "दुनिया की फार्मेसी" कहा जाता है। अब ध्यान केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि दवा निर्माण के कच्चे माल (ए-पी-आई) में आत्मनिर्भरता, गुणवत्ता मानकों, नई दवाओं की खोज और शोध-आधारित नवाचार पर है। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पी-एल-आई) योजना और बल्क ड्रग पार्क जैसी पहलें इसी दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाती हैं, जबकि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक सत्यापन एवं आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने पर भी बल दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुशिक्षित, कुशल और नैतिक मूल्यों वाले फार्मेसी पेशेवर ही इस विकास को सही दिशा में आगे ले जा सकते हैं।
इस अवसर पर लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ग्रुप डायरेक्टर एवं चीफ स्ट्रैटेजी ऑफिसर तथा हेड ऑफ ग्रोथ डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. पवार ने फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान-निर्माण के साथ-साथ पाठ्यक्रम निर्माण और पाठ्यक्रम समिति के सदस्य के रूप में तथा विभिन्न स्तरों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने फार्मेसी क्षेत्र में रोज़गार के बदलते परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हैदराबाद आज देश के फार्मा और लाइफ साइंसेज क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नोवार्टिस जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जी-सी-सी) वहाँ संचालित हो रहे हैं, एली लिली जैसी कंपनियाँ इनोवेशन हब विकसित कर रही हैं और लोंज़ा जैसी वैश्विक कंपनियाँ भी वहाँ जी-सी-सी स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इन केंद्रों में फार्मेसी विद्यार्थियों के लिए, विशेषकर फार्माकोविजिलेंस (दवा सुरक्षा), रेगुलेटरी अफेयर्स और क्लिनिकल डेटा मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में, बड़ी संख्या में रोज़गार के अवसर सृजित हो रहे हैं।
डॉ. सेठी ने कहा, "विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हम अपनी स्वदेशी शक्तियों, यानी अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार को सुदृढ़ करेंगे। लॉयड ग्रुप का प्रयास है कि हमारे विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण की सोच वाले सक्षम पेशेवर बनें। 'ग्लोबल लीडरशिप टॉक' जैसे मंच उन्हें देश के श्रेष्ठ विचारकों से सीधे सीखने का अवसर देते हैं। फार्मेसी के युवा स्वदेशी अनुसंधान, गुणवत्ता और आत्मनिर्भरता के माध्यम से इस लक्ष्य में अहम योगदान देंगे। मैं डॉ. पवार के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ।"
कार्यक्रम में संकाय सदस्यों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

Post a Comment

और नया पुराने