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56 वर्षों की परंपरा को सहेज रहा बालकोनगर का दुर्गा पूजा पंडाल, सूप, टोकरी, हाथ के पंखे और गमछों से जीवंत हुई पुराने दौर की जीवनशैली

बालकोनगर(कोरबा) फेस वार्ता नूरजहान, 18 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के बालकोनगर में नवरात्रि के अवसर पर भक्ति, परंपरा और भारतीय संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। सेक्टर-3 स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में मां आदिशक्ति की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। इस वर्ष पंडाल की विशेष सजावट श्रद्धालुओं को पुराने दौर की जीवनशैली और पारंपरिक भारतीय संस्कृति से रूबरू करा रही है। सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे, बोरे और दैनिक उपयोग की अन्य पारंपरिक वस्तुओं से सजा पंडाल लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
56 वर्षों से कायम है दुर्गा पूजा की परंपरा
बालको सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित यह उत्सव पिछले 56 वर्षों से बालकोनगर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान बना हुआ है। इस वर्ष 16 से 19 अक्टूबर तक चार दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। पूजा का शुभारंभ बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं पूर्णकालिक निदेशक राजेश सिंह ने किया। उन्होंने बालको परिवार के सदस्यों के साथ मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर कंपनी और क्षेत्र की निरंतर प्रगति, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
पारंपरिक वस्तुओं से साकार हुआ पुराने समय का परिवेश
इस बार दुर्गा पूजा पंडाल की सजावट में भारतीय परंपराओं और पुराने समय की जीवनशैली को प्रमुखता दी गई है। पंडाल में सूप, टोकरी, हाथ के पंखे, गमछे, बोरे सहित अनेक ऐसी वस्तुओं को सजाया गया है, जो कभी आम जनजीवन का अभिन्न हिस्सा हुआ करती थीं। इन वस्तुओं के माध्यम से उस समय के सामाजिक परिवेश की झलक प्रस्तुत की गई है, जब लोग सीमित संसाधनों में सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते थे।
पंडाल की यह अनूठी थीम केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पूर्वजों की जीवनशैली से परिचित कराने का प्रयास किया गया है। आधुनिकता के दौर में धीरे-धीरे दैनिक उपयोग से दूर होती जा रही पारंपरिक वस्तुओं को उत्सव का हिस्सा बनाकर उनके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को भी रेखांकित किया गया है।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
बालकोनगर का सार्वजनिक दुर्गा पूजा उत्सव धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और आपसी सद्भाव का प्रतीक भी है। बालकोनगर सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन करने और पंडाल की आकर्षक सजावट देखने पहुंच रहे हैं।
सामूहिक सहभागिता से सजा यह उत्सव लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने के साथ सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। मां दुर्गा की आराधना के बीच पारंपरिक भारतीय जीवनशैली की झलक प्रस्तुत करता यह पंडाल श्रद्धालुओं को अपनी जड़ों, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को संजोकर रखने का संदेश दे रहा है।

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