ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: ग्रेटर नोएडा, 4 सितंबर।ग्रेटर नोएडा में हुई बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं की स्थिति पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। थोड़ी देर की बारिश के बाद कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी भरने से उद्यमियों, कर्मचारियों और श्रमिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के अध्यक्ष अमित कुमार उपाध्याय ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि बारिश ने एक बार फिर जमीनी हकीकत सामने ला दी है। उनके मुताबिक, ईकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र पिछले कई वर्षों से जलभराव की समस्या से जूझ रहा है, लेकिन हर वर्ष बारिश से पहले किए जाने वाले दावे पहली बारिश में ही कमजोर पड़ जाते हैं।घुटनों तक पानी, फैक्ट्रियों में घुस रहा पानी
अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि थोड़ी देर की बारिश के बाद ही कई सड़कों पर पानी भर जाता है। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी हो जाती है कि लोगों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है। औद्योगिक इकाइयों में पानी पहुंचने से मशीनरी, कच्चे माल और तैयार उत्पादों को नुकसान का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि हजारों श्रमिक, कर्मचारी और उद्यमी जलभराव के बीच आवागमन करने को मजबूर हैं। मालवाहक वाहनों के फंसने से उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होती है, जबकि टूटी सड़कों और गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है।
बारिश से पहले दावे, पहली बारिश में खुली पोल
IBA अध्यक्ष ने कहा कि हर वर्ष बारिश से पहले ड्रेनेज व्यवस्था सुधारने, नालों की सफाई कराने और जलभराव रोकने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। इसके बावजूद पहली ही बारिश में अनेक स्थानों पर जलभराव की स्थिति सामने आ जाती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में सड़क, जलनिकासी, स्ट्रीट लाइट और साफ ड्रेन जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं, तो करोड़ों रुपये थीम पार्क, सौंदर्यीकरण और अन्य गैर-प्राथमिकता वाली परियोजनाओं पर खर्च करने की प्राथमिकता क्यों है?
“विकास की शुरुआत बुनियादी सुविधाओं से होती है, न कि केवल दिखावटी परियोजनाओं से।”
उद्यमी देते हैं प्राधिकरण को राजस्व
अमित कुमार उपाध्याय ने कहा कि उद्यमी लीज रेंट, ट्रांसफर चार्ज और अन्य शुल्कों के माध्यम से प्राधिकरण के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित सड़कें, प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था, नियमित नाला सफाई, बेहतर स्ट्रीट लाइट और गुणवत्तापूर्ण आधारभूत सुविधाएं मिलना प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में अभी भी ड्रेनेज व्यवस्था अधूरी है और जहां नाले बने हुए हैं, वहां भी समुचित सफाई नहीं होने के कारण जलनिकासी प्रभावित होती है। इसका सीधा असर उद्योगों की कार्यप्रणाली और कारोबार पर पड़ता है।
निवेश का माहौल बेहतर करने के लिए जरूरी है मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर
IBA अध्यक्ष ने कहा कि देश ‘विकसित भारत-2047’, ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था और वैश्विक निवेश की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहा है। ऐसे में यदि निवेशकों को पहली बारिश में ही जलमग्न सड़कें, फैक्ट्रियों में भरा पानी और बदहाल आधारभूत ढांचा दिखाई देगा तो निवेशकों का विश्वास मजबूत करना चुनौतीपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा कि मजबूत आधारभूत ढांचा ही औद्योगिक विकास की नींव है और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती।
IBA ने रखीं ये प्रमुख मांगें
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन की ओर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की गई है कि—
जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए।
सभी नालों की तत्काल प्रभाव से सफाई कराई जाए।
क्षतिग्रस्त सड़कों का पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कराया जाए।
औद्योगिक क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था दुरुस्त की जाए।
ड्रेनेज व्यवस्था को प्रभावी एवं स्थायी बनाया जाए।
जलभराव के कारण उद्योगों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।
लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
“उद्यमियों को आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए”
अमित कुमार उपाध्याय ने कहा, “उद्यमियों को अब आश्वासन नहीं, परिणाम चाहिए। उद्योग सुरक्षित रहेंगे, तभी निवेश आएगा, रोजगार बढ़ेगा और विकसित भारत का सपना साकार होगा। अब समय आ गया है कि प्राधिकरण दिखावटी विकास नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाला विकास करे।”
यह जानकारी अमित कुमार उपाध्याय, अध्यक्ष, इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA), गौतम बुद्ध नगर की ओर से दी गई।
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