Top News

उत्तर प्रदेश के GIMS ग्रेटर नोएडा ने AIIMS नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में किया प्रतिभाग; मेडिकल इनोवेशन सेंटर की पहल ने बटोरी विशेष चर्चा।

नागपुर, फेस वार्ता: राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने AIIMS नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन 2026 में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए रोगी सुरक्षा, चिकित्सा नवाचार एवं प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के प्रतिष्ठित एम्स (AIIMS) एवं प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों, चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सम्मेलन के दौरान “सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: चिकित्सा उपकरणों एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लेकर क्लिनिकल इनोवेशन तक” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया गया।इस सत्र में ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता, निदेशक, GIMS ग्रेटर नोएडा, को विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया गया। उन्होंने उच्च रोगी भार वाले सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा की चुनौतियों, सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों तथा तकनीक एवं नवाचार की आवश्यकता पर GIMS का अनुभव प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बड़े सरकारी अस्पतालों में रोगी सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऐसे समाधान विकसित किए जाने चाहिए जो व्यावहारिक, किफायती, सुरक्षित तथा बड़े स्तर पर लागू किए जा सकें।

मेडिकल इनोवेशन सेंटर, GIMS की राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति
डॉ. राकेश गुप्ता की प्रस्तुति के पश्चात डॉ. राहुल सिंह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सेंटर फॉर मेडिकल इनोवेशन (CMI), GIMS, ने GIMS के मेडिकल इनोवेशन सेंटर पर केस प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति में बताया गया कि GIMS का मेडिकल इनोवेशन सेंटर किस प्रकार चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, इंजीनियरों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स एवं तकनीकी विशेषज्ञों को एक साझा मंच उपलब्ध करा रहा है, ताकि अस्पतालों में सामने आने वाली वास्तविक चिकित्सा समस्याओं की पहचान कर उनके लिए तकनीक आधारित समाधान विकसित किए जा सकें।
इस अवसर पर मेडिकल इनोवेशन सेंटर से जुड़ी कुछ तकनीकों एवं नवाचारों का प्रदर्शन भी किया गया। इन तकनीकों का उद्देश्य रोगी देखभाल में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में मौजूद अंतर को कम करना तथा तकनीक के माध्यम से अधिक सुरक्षित, प्रभावी एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

मेडिकल इनोवेशन सेंटर ने बटोरी विशेष चर्चा
देशभर के प्रतिष्ठित एम्स एवं चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों की सहभागिता वाले इस राष्ट्रीय मंच पर GIMS के मेडिकल इनोवेशन सेंटर की पहल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से चिकित्सा उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हेल्थटेक एवं क्लिनिकल इनोवेशन को रोगी सुरक्षा से जोड़ने वाले GIMS के मॉडल को महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया।
GIMS का मेडिकल इनोवेशन मॉडल “क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से रोगी लाभ” की अवधारणा पर आधारित है। इसके अंतर्गत वास्तविक क्लिनिकल समस्या की पहचान से लेकर तकनीकी समाधान, प्रोटोटाइप, नियामकीय मार्गदर्शन, क्लिनिकल परीक्षण एवं सत्यापन तथा आगे उपयोग एवं व्यावसायीकरण तक की प्रक्रिया को एकीकृत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इस मॉडल की विशेषता यह है कि नई तकनीकों को केवल प्रयोगशाला अथवा सैद्धांतिक स्तर पर विकसित करने के बजाय उन्हें वास्तविक अस्पताल एवं क्लिनिकल वातावरण की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित एवं परखा जाता है। इससे ऐसे समाधान तैयार करने में सहायता मिलती है जो वास्तव में मरीजों और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

उत्तर प्रदेश में मेडिकल इनोवेशन को नई पहचान
राष्ट्रीय सम्मेलन में GIMS की सहभागिता ने उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे मेडिकल इनोवेशन एवं हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को भी राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया। GIMS का प्रयास है कि डॉक्टर, इंजीनियर, शोधकर्ता, स्टार्टअप और उद्योग एक साथ मिलकर स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के समाधान विकसित करें।
मेडिकल इनोवेशन सेंटर के माध्यम से मेडिकल डिवाइस, डायग्नोस्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ एवं अन्य उभरती स्वास्थ्य तकनीकों को क्लिनिकल आवश्यकताओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसका दीर्घकालिक उद्देश्य भारत में विकसित तकनीकों को क्लिनिकल उपयोग तक पहुंचाना तथा मरीजों के लिए अधिक किफायती, सुलभ और सुरक्षित स्वास्थ्य समाधान उपलब्ध कराना है।
GIMS की इस राष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति ने यह संदेश भी दिया कि एक सरकारी मेडिकल संस्थान केवल चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं उपचार का केंद्र ही नहीं, बल्कि क्लिनिकल समस्याओं की पहचान कर उनके लिए स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करने और उन्हें मरीजों तक पहुंचाने वाला मेडिकल इनोवेशन हब भी बन सकता है।

राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा सम्मेलन में GIMS की सहभागिता रोगी सुरक्षा और मेडिकल इनोवेशन को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा यह उत्तर प्रदेश को चिकित्सा नवाचार और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
“क्लिनिकल आवश्यकता से नवाचार और नवाचार से बेहतर रोगी देखभाल—GIMS सुरक्षित, सुलभ, किफायती एवं तकनीक-सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समाधान विकसित करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।”

Post a Comment

और नया पुराने