ज्ञापन सौंपकर किसानों व पशुपालकों के हित सुरक्षित रखने की मांग
ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता:भारतीय किसान यूनियन बलराज संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि एवं दुग्ध उत्पादों को शामिल न किए जाने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों और पशुपालकों के हितों की रक्षा की अपील की गई है।ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया गया कि प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि और दुग्ध क्षेत्र को शामिल न किया जाए, क्योंकि इससे देश के छोटे एवं सीमांत किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि पहले भी सरकार ने किसानों की खेती और दुग्ध उत्पादन से जुड़े हितों से समझौता न करने का भरोसा दिया था।
ज्ञापन में कहा गया कि हाल के महीनों में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और व्यापारिक चर्चाओं के बाद यह आशंका बढ़ी है कि कृषि और डेयरी उत्पाद व्यापार समझौते का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं अमेरिका की कृषि सचिव ब्रुक रोलिंस के बयान का हवाला देते हुए संगठन ने कहा कि इससे अमेरिकी किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई, जिससे भारतीय किसानों में चिंता बढ़ी है।संगठन का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में सीमांत किसान पशुपालन और दूध उत्पादन पर निर्भर हैं। यदि विदेशी दुग्ध उत्पाद या सस्ता मिल्क पाउडर बड़े पैमाने पर बाजार में आया तो स्थानीय किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।किसान यूनियन ने मांग की है कि प्रस्तावित समझौते में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र को पूरी तरह बाहर रखा जाए, ताकि किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।इस दौरान राष्ट्रीय संगठन मंत्री चंद्रपाल बंसल, उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल भाटी, सोनू खारी, युवा प्रदेश अध्यक्ष विपिन खारी, प्रदेश सचिव दिलदार अंसारी, महासचिव यामीन अंसारी, मेरठ मंडल अध्यक्ष जतन भाटी, मंडल उपाध्यक्ष कृष्णा तंवर, जिला अध्यक्ष योगेश वैष्णव, नोएडा महानगर अध्यक्ष कपिल नागर, युवा मोर्चा अध्यक्ष अमित कसाना सहित कार्यकर्ता उपस्थित
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