400 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय, सरकार उठाएगी पूरा खर्च।
ग्रेटर नोएडा/फेस वार्ता: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा की ऐतिहासिक सौगात दी है। प्रदेश के बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत सरकारी के साथ-साथ निजी संस्था एवं निजी स्कूलों (स्ववित्तपोषित/वित्तविहीन) में कार्यरत शिक्षक भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर एमएलसी शिक्षक चंद शर्मा ने पत्रकार वार्ता आयोजित की प्रदेश सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षकों, शिक्षामित्रों और शिक्षा से जुड़े अन्य कार्मिकों के लिए बड़ी राहत है, जिससे उन्हें गंभीर बीमारी या आपात स्थिति में आर्थिक संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।
पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष अभिषेक शर्मा, राहुल पंडित (सदस्य विधान परिषद), कर्मवीर आर्य (जिला मेफिया प्रभारी), वीरेंद्र भाटी, सहित विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी एवं दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया।निजी व सरकारी, इस योजना के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषदीय, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (CWSN), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की वार्डेन, पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक/शिक्षिका तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना की रसोईया और उनके आश्रित परिवार के सदस्य शामिल किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि प्रति कार्मिक लगभग 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम के आधार पर लगभग 15 लाख लाभार्थियों के लिए कुल करीब 400 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय भार आएगा, जिसे प्रदेश सरकार वहन करेगी।
निजी अस्पतालों में भी कैशलेस उपचार
इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा का क्रियान्वयन State Agency for Comprehensive Health and Integrated Services (SACHIS) के माध्यम से किया जाएगा। योजना के अंतर्गत इलाज राजकीय चिकित्सालयों के साथ-साथ साचीज से संबद्ध निजी चिकित्सालयों में भी उपलब्ध होगा। उपचार की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) द्वारा निर्धारित दरों के अनुरूप होंगी।
शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक निर्णय
पत्रकार वार्ता में मौजूद नेताओं और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी इस योजना में शामिल किया जाना एक ऐतिहासिक कदम है। इससे शिक्षा जगत से जुड़े हर वर्ग को समान स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी और शिक्षक निश्चिंत होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकेंगे।
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