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दीन-दुखियों की सेवा ही भगवान की सेवा है — परम पूज्यश्री अतुल कृष्ण भारद्वाज


 श्री धार्मिक रामलीला कमेटी के तत्वाधान में रामलीला मैदान ऐछर बिरोड़ा सेक्टर पाई 1 में अंतर्राष्ट्रीय कथावाचक श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी के अमृत मयी वाणी से श्री राम कथा आयोजन का आज छठवां दिन 
पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने भगवान श्रीराम द्वारा धनुष भंग, परशुराम-लक्ष्मण संवाद एवं श्रीराम विवाह के रोचक प्रसंगों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि जब विश्वामित्र जी ने सम्पूर्ण उत्तर भारत को दुष्टजनों से श्रीराम के माध्यम से मुक्त करा लिया और सभी ऋषि-मुनियों के यज्ञ सुचारू रूप से होने लगे, तब वे श्रीराम को जनकपुरी ले गए, जहाँ सीता स्वयंवर चल रहा था। स्वयंवर में जब कोई भी राजा धनुष को नहीं तोड़ सका, तब श्रीराम ने विश्वामित्र जी की आज्ञा प्राप्त कर उस धनुष को भंग कर दिया। इसका अर्थ था कि अब पूरे विश्व में दुष्टों को सावधान हो जाना चाहिए कि चाहे वे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, उनकी राक्षसी वृत्ति अब टिक नहीं सकेगी।
धनुष टूटने का समाचार पाकर परशुराम जी स्वयंवर सभा में आए और श्रीराम एवं लक्ष्मण से संवाद किया। अंततः वे इस बात से संतुष्ट हुए कि श्रीराम सम्पूर्ण विश्व के कल्याण में समर्थ हैं। इसके बाद वे अपने आराध्य के प्रति भक्ति में लीन हो गए। समाज की जो जिम्मेदारी परशुराम जी ने अपने ऊपर ले रखी थी, उसे उन्होंने श्रीराम को सौंप दिया और स्वयं तप व भक्ति में प्रवृत्त हो गए।
कथा व्यास ने आगे कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। यदि हम समाज में दीन-दुखियों, वनवासियों और आदिवासियों के कष्टों को दूर करने का प्रयास करें तथा संगठित शक्ति के माध्यम से समाज की बुराइयों का नाश करें, तो यही सच्ची सेवा है। इसी कारण श्रीराम भगवान कहलाए। आज भी समाज में व्याप्त बुराइयों को केवल संगठित होकर ही दूर किया जा सकता है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए व्यास जी ने बताया कि राजा जनक ने राजा दशरथ को बारात लाने का निमंत्रण भेजा। राजा दशरथ हर्षोल्लास के साथ बारातियों सहित जनकपुरी पहुँचे। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने भावपूर्वक नृत्य एवं गायन किया।पूज्य अतुल कृष्ण भारद्वाज जी ने श्रोताओं से आग्रह करते हुए कहा कि जिस संगठित शक्ति के बल पर वनवासी एवं गिरिवासी बंधुओं ने आपत्तिकाल में श्रीहनुमान जी महाराज के नेतृत्व में धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश हेतु कार्य किया, उसी प्रकार हमें भी सभी भेदभावों से ऊपर उठकर जीवन में कुछ महान करने की प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि समाज में व्याप्त ऊँच-नीच, छुआछूत और भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

हनुमान जी की तरह भगवान के नाम का सुमिरन और कीर्तन जीवन का हिस्सा बने इन सारी बातों को महाराज जी ने बड़ी सुगमता से कथा श्रोताओं के सामने रख सबको धन्य किया।
आज कथा मुख्य यजमान श्री हरवीर मावी सह मुख्य यजमान शेर सिंह भाटी, धीरज शर्मा रहे हैं। 
आज के दैनिक यजमान प्रमोद चौहान , चरण जीत नागर ।
इस राम कथा में आज वरिष्ठ प्रचारक ईश्वर दयाल जी, स्वामी सुशील जी महाराज, प्रांत प्रचारक वेदपाल जी, जिला प्रचारक नेम पाल जी, राजकुमार जी, अध्यक्ष आनंद भाटी, पंडित प्रदीप शर्मा, कुलदीप शर्मा, दिनेश गुप्ता, पवन नागर, ममता तिवारी, मनीष डावर, अतुल आनंद, फिरे प्रधान, सत्यवीर मुखिया, महेश शर्मा बदौली, उमेश गौतम, रोशनी सिंह, वीरपाल मावी, तेज कुमार भाटी, सुंदर भाटी, भगवत भाटी, ज्योति सिंह, अश्विनी शुक्ला, राकेश बैसोया, रश्मि अरोड़ा, गीता सागर, यशपाल नागर, चैनपाल प्रधान अजय कसाना पवन भाटी राजेश नंबर दार राकेश नंबरदार उपस्थित रहे हैं।

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