ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता, शारदा यूनिवर्सिटी द्वारा दो दिवसीय हाइब्रिड अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण के कानूनी ढांचे और नीतियों की अवधारणा: मुद्दे और चुनौतियाँ” का सफल आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन समारोह 16 जनवरी, 2026 को तथा समापन समारोह 17 जनवरी, 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ।यह सम्मेलन विद्वानों, न्यायविदों, नीति निर्माताओं, पर्यावरणविदों, पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच सिद्ध हुआ, जहाँ घरेलू जानवरों के कल्याण और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े कानूनी, नैतिक और नीति-आधारित मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।चर्चाओं में विधायी अंतराल, प्रवर्तन संबंधी चुनौतियाँ तथा पशु अधिकारों और जैव विविधता संरक्षण हेतु प्रभावी कानूनों की आवश्यकता को रेखांकित किया गया।उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने पशु क्रूरता, वन्य जीवन अपराध, आवासीय क्षरण, जलवायु परिवर्तन और मानव-पशु संघर्ष जैसी उभरती चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए मजबूत और संवेदनशील कानूनी ढाँचों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही, सतत और मानवीय संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु अंतरविषयक सहयोग और नीति-आधारित अनुसंधान को आवश्यक बताया गया।सम्मेलन के दौरान वाई. के. गुप्ता, उपाध्यक्ष एवं प्रो-चांसलर, शारदा यूनिवर्सिटी ने कहा “घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि हमारी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे अकादमिक मंच सहानुभूति, स्थिरता और मानव-पशु सह-अस्तित्व को मजबूत करने वाली नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”प्रोफेसर (डॉ.) ऋषिकेश डेव, डीन, शारदा स्कूल ऑफ लॉ ने कहा “घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रश्न अब केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि संवैधानिक और मानवाधिकार विमर्श का भी हिस्सा बन चुके हैं। यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को कानून को अधिक मानवीय और उत्तरदायी दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करता है।”प्रोफेसर (डॉ.) रॉबर्ट सुकी, वाईस रेक्टर, कारोली गास्पार विश्वविद्यालय, हंगरी ने अपने संबोधन में कहा “शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से पर्यावरणीय और पशु संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना आज की आवश्यकता है। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नेतृत्व तैयार करने की दिशा में केंद्रित है।”
सम्मेलन के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति प्रसन्ना भालचंद्र वराले, न्यायाधीश, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा:“घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा हमारे संवैधानिक मूल्यों, पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। ऐसे अकादमिक मंच नीति-उन्मुख और व्यावहारिक समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।”समापन समारोह में सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं और अकादमिक निष्कर्षों का सार प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों ने इसे पशु संरक्षण और वन्य जीवन सुरक्षा पर अनुसंधान, नीति संवाद और जागरूकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।सम्मेलन में प्रोफेसर (डॉ.) वी. के. आहुजा, निदेशक, इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट; प्रोफेसर (डॉ.) भूपिंदर सिंह, प्रोफेसर (डॉ.) राहुल जे. निकम, प्रोफेसर (डॉ.) तारकेश मोलिया, डॉ. रज़िया चौहान , (डॉ.) अक्सा फातिमा , स्वर्णिमा गौरानी सहित शारदा स्कूल ऑफ लॉ के संकाय सदस्य, विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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