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लॉयड में जुटेंगे देशभर के युवा शोधार्थी, डीएचआर-आईसीएमआर प्रायोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मेडिकल इनोवेशन पर होगा मंथन

ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: लॉयड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी, ग्रेटर नोएडा में 6 से 10 अक्टूबर तक भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अंतर्गत स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “हेल्थ टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन, रेगुलेशन एंड इनोवेशन” का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला की थीम “एन इंटीग्रेटेड पाथवे फ्रॉम क्लीनिकल नीड टू मेडिकल प्रोडक्ट डेवलपमेंट” है।
कार्यशाला का आयोजन संस्थान की इनोवेशन काउंसिल, जो शिक्षा मंत्रालय की पहल है, के सहयोग से लॉयड कैंपस-1 के मेनफ्रेम, द्वितीय तल, ए-ब्लॉक में किया जाएगा। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित युवा शोधार्थी, विद्यार्थी और विशेषज्ञ एक मंच पर जुटेंगे तथा स्वास्थ्य तकनीक, मेडिकल डिवाइस, दवा विकास, नियामकीय प्रक्रिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिकित्सा नवाचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।
177 पंजीकरण में से 78 प्रतिभागियों का चयन
कार्यशाला की संयोजक लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ग्रुप डायरेक्टर एवं चीफ स्ट्रैटेजिस्ट प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा सेठी हैं। आयोजन सचिव की जिम्मेदारी डॉ. ललित कुमार त्यागी, प्राचार्य, एलआईएमटी (डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी) एवं प्रो. आरती गुप्ता निभा रही हैं।
कार्यशाला की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में प्रो. (डॉ.) वंदना अरोड़ा सेठी ने कहा कि यह आयोजन विद्यार्थियों एवं युवा शोधकर्ताओं को क्लीनिकल आवश्यकता की पहचान से लेकर मेडिकल प्रोडक्ट के नियामकीय अनुमोदन तक की पूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देगा। उन्होंने कहा कि लॉयड ग्रुप अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को लगातार बढ़ावा दे रहा है और डीएचआर-आईसीएमआर का सहयोग संस्थान के लिए गौरव की बात है।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला के लिए देशभर से 177 पंजीकरण प्राप्त हुए, जिनमें कठोर चयन प्रक्रिया के बाद 78 प्रतिभागियों का चयन किया गया है। प्रतिभागी दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सहित सात से अधिक राज्यों के 25 से अधिक कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
इनमें पारुल विश्वविद्यालय वडोदरा, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल, बनस्थली विद्यापीठ, एमिटी विश्वविद्यालय नोएडा, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय जोधपुर, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर, शारदा विश्वविद्यालय, इंटीग्रल विश्वविद्यालय लखनऊ, गलगोटिया विश्वविद्यालय, ग्लोबस कॉलेज ऑफ फार्मेसी भोपाल, आईएफटीएम विश्वविद्यालय मुरादाबाद, महावीर विश्वविद्यालय मेरठ, एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल, बालाजी कॉलेज ऑफ फार्मेसी जयपुर, सुरेश ज्ञान विहार विश्वविद्यालय जयपुर सहित कई प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।
विशेषज्ञों के व्याख्यान और होंगे हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण
पांच दिवसीय कार्यशाला में प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि विभिन्न विषयों पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। पहले दिन आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों द्वारा अनमेट क्लिनिकल नीड आइडेंटिफिकेशन, हेल्थकेयर गैप एनालिसिस, डिजाइन थिंकिंग और एजाइल प्रोटोटाइपिंग जैसे विषयों पर सत्र होंगे।
दूसरे दिन जीआईएमएस ग्रेटर नोएडा और मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र के विशेषज्ञ मेडटेक, डिजिटल हेल्थ, क्लीनिकल ट्रायल्स तथा मेडिकल डिवाइस रेगुलेटरी स्ट्रैटेजी पर जानकारी देंगे। नाइपर रायबरेली के विशेषज्ञ द्वारा क्वालिटी बाय डिजाइन (QbD), फॉर्मूलेशन एवं प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
तीसरे दिन शारदा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ बायोमेडिकल साइंसेज में इन-सिलिको टूल्स तथा हेल्थकेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर व्याख्यान देंगे। इसके साथ हेल्थकेयर एआई मॉडल के नो-कोड दृष्टिकोण पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी होगा।
चौथे दिन एमएनआईटी इलाहाबाद और केन्व्यू, मुंबई के विशेषज्ञ बायोमटेरियल्स रिसर्च, 3D बायोमिमेटिक कंपोजिट स्कैफोल्ड, नैनोफॉर्मूलेशन तथा एडवांस्ड एचपीएलसी तकनीक पर प्रशिक्षण देंगे।
समापन दिवस पर CAR-T थेरेपी से नैनो ड्रग डिलीवरी तक होगी चर्चा
कार्यशाला के अंतिम दिन सॉलिड ट्यूमर बैरियर एवं नेक्स्ट-जेनरेशन CAR-T थेरेपी, ब्रेन-टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी हेतु इंजीनियर्ड नैनोक्रिस्टल्स तथा सिमुलेशन आधारित प्री-क्लिनिकल टेस्टिंग जैसे उन्नत विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान होंगे।
इस अवसर पर डीएचआर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वैज्ञानिक-सी एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. गीतांजलि सागीना विशेष संबोधन देंगी। समापन सत्र में डॉ. आरती गुप्ता, प्रोफेसर, एलआईएमटी (डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी) धन्यवाद ज्ञापित करेंगी। इसके बाद समूह फोटोग्राफ और प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए जाएंगे।
कार्यशाला के प्रत्येक दिन सत्रों के अंत में मूल्यांकन परीक्षा भी आयोजित की जाएगी, जिससे प्रतिभागियों की सीखने की प्रक्रिया की निरंतर समीक्षा की जा सके। आयोजकों का मानना है कि यह राष्ट्रीय कार्यशाला युवा शोधकर्ताओं को प्रयोगशाला से चिकित्सा उत्पाद तक की यात्रा को समझने और भारत में स्वास्थ्य तकनीकी नवाचार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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