दिल्ली-एनसीआर के दंत चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने लिया भाग, समय पर निदान और आधुनिक तकनीकों के महत्व पर दिया जोर
ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता, 14 अक्टूबर 2026 आईटीएस डेंटल कॉलेज, ग्रेटर नोएडा में 13 अक्टूबर को ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (चेहरे की नसों से जुड़ी असहनीय दर्द की स्थिति) के आधुनिक उपचार पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग तथा ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग की ओर से एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया के दिल्ली-एनसीआर स्टेट चैप्टर के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के लक्षणों, सटीक निदान, प्रभावी उपचार और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की जानकारी देना तथा उनके व्यावहारिक एवं नैदानिक ज्ञान को विकसित करना था।
समय पर निदान और सही उपचार से दर्द प्रबंधन में मिलती है मदद : डॉ. अनुराग अग्रवाल
कार्यशाला के मुख्य वक्ता फोर्टिस हॉस्पिटल, नोएडा में इमरजेंसी मेडिसिन एंड ट्रॉमा के निदेशक तथा हेड पेन एंड पैलिएटिव केयर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के लक्षणों और उपचार के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया चेहरे की संवेदना से जुड़ी नस को प्रभावित करने वाली एक गंभीर स्थिति है, जिसमें रोगी को अचानक, तीव्र और असहनीय दर्द का अनुभव हो सकता है। ऐसे मामलों में समय पर सही निदान और रोगी की स्थिति के अनुरूप उपचार का चयन बेहद महत्वपूर्ण है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि दंत चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय तथा आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी से रोगियों को प्रभावी दर्द प्रबंधन और बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की जानकारी नैदानिक कौशल के लिए जरूरी : डॉ. ओमकार के. शेट्टी
संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. ओमकार के. शेट्टी ने कहा कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया जैसी जटिल और पीड़ादायक स्थिति के प्रभावी प्रबंधन के लिए सटीक निदान, नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक उपचार तकनीकों की समझ आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं दंत चिकित्सकों और विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नवीनतम विकास से परिचित कराने के साथ-साथ उनके नैदानिक कौशल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सही निदान प्रभावी उपचार की पहली सीढ़ी : डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव
आईटीएस डेंटल कॉलेज के ओरल मेडिसिन एंड रेडियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने कहा कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया की समय पर पहचान करना प्रभावी उपचार की दिशा में पहला और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने रोग की सही पहचान और उचित उपचार योजना के महत्व पर जोर दिया।
उपचार में शल्य चिकित्सा की भी अहम भूमिका : डॉ. हिमांशु भूटानी
ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु भूटानी ने कहा कि ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के प्रभावी प्रबंधन में आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आवश्यकता के अनुसार शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने इस क्षेत्र में विकसित हो रही उपचार तकनीकों की जानकारी को चिकित्सकों के लिए उपयोगी बताया।
विद्यार्थियों और चिकित्सकों को उन्नत ज्ञान उपलब्ध कराने पर जोर
आईटीएस-द एजुकेशन ग्रुप के उपाध्यक्ष सोहिल चड्ढा ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान विद्यार्थियों और चिकित्सकों को उन्नत ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम चिकित्सा विशेषज्ञों को नई तकनीकों से परिचित कराने और रोगियों को बेहतर, सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया के निदान, उपचार और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं।
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