ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: के प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं समाजसेवी भगवत प्रसाद शर्मा को भारत सरकार से मान्यता प्राप्त “साहित्य सेवा अवार्ड काउंसिल” द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह में “डॉक्टरेट की मानद उपाधि (Honorary Doctorate)” तथा “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” से विभूषित किया गया। उन्हें यह सर्वोच्च सम्मान शिक्षा, समाजसेवा, साहित्य तथा सांस्कृतिक जागरण के क्षेत्र में उनके दीर्घकालिक, उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
उल्लेखनीय है कि साहित्य सेवा अवार्ड काउंसिल” द्वारा आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे सैकड़ों साहित्यकारों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, कलाकारों तथा विविध क्षेत्रों की विशिष्ट प्रतिभाओं को उनके उत्कृष्ट कार्यों एवं राष्ट्रनिर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि हिन्दी फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता शहबाज़ ख़ान रहे, जबकि विशिष्ट अतिथियों के रूप में प्रसिद्ध लेखक एवं फिल्म निर्देशक इक़बाल दुर्रानी, शिक्षा निदेशालय, दिल्ली के प्रवक्ता अजय तिवारी, डॉ. महेश शर्मा (डीडीओ/ईडीयू–आरटीओ) तथा शिक्षा विभाग के पूर्व उपनिदेशक ऋषि पाल राणा की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा को चार चाँद लगा दिए।
कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचार एवं श्रीगणेश वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का विधिवत उद्घाटन किया। आयोजन के दौरान शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, समाजसेवा एवं जनकल्याण के विविध आयामों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान कर उनके अविस्मरणीय अवदान का अभिनंदन किया गया। यह आयोजन प्रतिभाओं के सम्मान, सामाजिक चेतना के संवर्धन तथा राष्ट्रहित में सकारात्मक परिवर्तन की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि यह सम्मान उन विभूतियों को समर्पित है जिन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता, दूरदर्शी नेतृत्व, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्रोत्थान के प्रति अद्वितीय समर्पण का परिचय दिया है। भगवत प्रसाद शर्मा की कर्मनिष्ठा, पेशेवर ईमानदारी, सामाजिक प्रतिबद्धता एवं लोकमंगल के प्रति सतत समर्पण उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान का स्वाभाविक अधिकारी बनाता है।सम्मान प्राप्त करने के उपरान्त भगवत प्रसाद शर्मा ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि विगत अनेक वर्षों से वे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंचों पर अपनी रचनाओं, विचारों तथा जनजागरण संबंधी गतिविधियों के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रीय संस्कारों के संवर्धन का सतत प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी समस्त साहित्यिक एवं सामाजिक साधना का मूल उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, मानवीय मूल्यों का संवर्धन तथा युवा पीढ़ी में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं राष्ट्रनिर्माण के प्रति समर्पण की भावना जागृत करना है।उन्होंने इस सम्मान को अपने व्यक्तिगत गौरव का नहीं, बल्कि शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा के प्रति समर्पित समस्त कर्मयोगियों का सम्मान बताते हुए कहा कि यह अलंकरण उन्हें भविष्य में और अधिक निष्ठा, समर्पण एवं उत्तरदायित्व के साथ समाजहित एवं राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा प्रदान करेगा।
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