नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण पर दिया गया जोर
ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: शारदा विश्वविद्यालय के आईपीआर सेल द्वारा विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा नवाचार और शोध को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में भारत सरकार के पूर्व सचिव, एमएसएमई एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दिनेश राय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि नवाचार और नीति निर्माण को साथ लेकर चलना ही विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके विचारों ने छात्रों और शोधकर्ताओं को नवाचार के प्रति रणनीतिक सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
विशेष अतिथि सतीश कुमार ने एमएसएमई से जुड़ी आईपीआर योजनाओं और सहायता प्रणालियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतुलित और प्रभावी वैश्विक बौद्धिक संपदा पारिस्थितिकी तंत्र ही बेहतर और टिकाऊ भविष्य के लिए नवाचार तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम का संचालन शारदा विश्वविद्यालय के एसोसिएट डीन (अनुसंधान) एवं आईपीआर सेल के प्रमुख डॉ. मोहित साहनी ने किया। वहीं डीन (अनुसंधान) डॉ. भुवनेश कुमार और कुलपति प्रो. सिबाराम खारा ने छात्रों को अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बौद्धिक संपदा अधिकारों पर आयोजित पांच विशेषज्ञ व्याख्यानों की श्रृंखला रही। प्रतिष्ठित कानूनी फर्मों के विशेषज्ञों ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी भी नवाचार की सुरक्षा और व्यावसायिक सफलता के लिए आईपीआर की समझ बेहद आवश्यक है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य, शोधार्थी, छात्र और स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में नवाचार, रचनात्मकता और उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ विचारों की सुरक्षा के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
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