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1857 की क्रांति के गुमनाम नायकों को याद करेगा गौतम बुद्ध नगर, इतिहास सहेजने का लिया संकल्प।

ग्रेटर नोएडा/ फेस वार्ता: भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति में गौतम बुद्ध नगर और उससे जुड़े क्षेत्रों की ऐतिहासिक भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा जर्नलिस्ट प्रेस क्लब, सेक्टर अल्फा-1 में एक महत्वपूर्ण विचार गोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, इतिहासकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लेकर स्थानीय वीर क्रांतिकारियों के योगदान पर मंथन किया और शहीदों के सम्मान व इतिहास के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत 10 मई 1857 की उस ऐतिहासिक घटना के स्मरण से हुई, जब मेरठ में कोतवाल धन सिंह गुर्जर के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजा था। वक्ताओं ने बताया कि यह क्रांति जब दादरी और तत्कालीन बुलंदशहर क्षेत्र तक पहुंची, तब राव उमराव सिंह ने नेतृत्व संभालते हुए स्थानीय ग्रामीणों और क्रांतिकारियों के साथ अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। अंग्रेजी शासन ने प्रतिशोध स्वरूप बुलंदशहर के काले आम चौराहे पर 84 क्रांतिकारियों को फांसी पर लटका दिया था, जिसे आज भी स्वतंत्रता संग्राम के सबसे दर्दनाक अध्यायों में गिना जाता है।
दादरी विधायक तेजपाल सिंह नागर ने कहा कि 84 शहीदों का बलिदान केवल क्षेत्रीय इतिहास नहीं, बल्कि राष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि दादरी बस स्टैंड का नाम राव उमराव सिंह के नाम पर रखा जा चुका है और उनकी प्रतिमा स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है। उन्होंने शहीदों के सम्मान से जुड़ी हर पहल में सहयोग का भरोसा दिलाया।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष दीपक भाटी ने कहा कि काले आम पर अंकित 84 शहीदों के नाम हमें यह याद दिलाते हैं कि आजादी पूरे समाज के सामूहिक संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने शहीद परिवारों को भी सम्मानित किए जाने की आवश्यकता बताई।
इतिहास शोधकर्ता समय सिंह कसाना ने कहा कि मेरठ से शुरू हुई क्रांति ने पूरे उत्तर भारत में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और दादरी-बुलंदशहर क्षेत्र ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि सभी समाजों ने मिलकर इस आंदोलन को मजबूती दी थी।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता दुष्यंत नागर ने सूरजपुर, दनकौर और सिकंदराबाद समेत आसपास के क्षेत्रों में हुए संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय महिलाओं ने भी अंग्रेजी सेना का डटकर सामना किया था।
सामाजिक कार्यकर्ता आलोक सिंह ने कहा कि शहीदों का संघर्ष आज भी समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसुविधाओं के लिए संगठित होकर लड़ने की प्रेरणा देता है। वहीं करप्शन फ्री इंडिया संगठन के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय ने शहीद परिवारों के गांवों में सम्मान समारोह आयोजित करने और उनके नाम पर मार्ग व स्मारक बनाने का सुझाव दिया।
ग्रेटर नोएडा जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के अध्यक्ष नरेंद्र भाटी ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे गौतम बुद्ध नगर में स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को संरक्षित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास के बीच उन शहीदों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की नींव रखी।
गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 1857 की क्रांति में गौतम बुद्ध नगर के योगदान का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाएगा, शहीदों की स्मृति में ठोस पहल की जाएगी और इस गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

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